मुजफ्फरपुर, जासं। जिले को नेपाल से जोडऩे वाले एनएच-527सी (मझौली-चोरौत) के निर्माण में कई तरह की बाधाएं आ रही हैं। इनमें से एक बाधा इसके अलाइनमेंट में सरकारी स्कूलों के आने को लेकर भी है। इन स्कूलों को होने वाली क्षति का आकलन करने के लिए समाहर्ता प्रणव कुमार ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई है। डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान को कमेटी का समन्वयक बनाया गया है।

मालूम हो कि एनएच के निर्माण को लेकर सरकारी स्कूल के अलावा कई धार्मिक स्थल की भी बाधा आ रही है। इन धार्मिक स्थलों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने को लेकर पहले ही संबंधित अंचलाधिकारी को निर्देश दिया जा चुका है। इन स्कूलों को होने वाली क्षति का आकलन इसी वर्ष जनवरी में भी किया गया था। इसमें करीब 98 लाख रुपये की क्षति का आकलन किया गया था। इसे लेकर पेच फंसने पर इसका फिर से मूल्यांकन कराया जा रहा है।

जारी आदेश में समाहर्ता ने कहा कि एनएच निर्माण से सरकारी जमीन पर बने स्कूलों को होने वाली वित्तीय क्षति का मूल्यांकन किया जाना है। दो दिनों में इस ङ्क्षबदु पर प्राक्कलन तैयार कर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं ताकि इसे एनएचएआइ को भेजी जा सके। कमेटी में भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, सर्व शिक्षा अभियान के सहायक अभियंता एवं एनएचएआइ के अभियंता को भी शामिल किया गया है।

इन स्कूलों की तैयार की जानी है रिपोर्ट। साथ में पूर्व की रिपोर्ट में क्षति का मूल्यांकन

  •  राजकीय प्राथमिक विद्यालय बोरवारा, बोचहां : 28,85,980 रुपये
  •  मध्य विद्यालय हसनागढ़ी, गायघाट : 41,62,331 रुपये
  •  अधिकलाल झा उच्च विद्यालय खंगुरा, कटरा : 27, 29, 249 रुपये

नल जल योजना की राशि में गबन मामले में प्राथमिकी

 प्रखंड क्षेत्र की कांटा पिरौंछा उत्तरी पंचायत के दो वार्डों में नल जल योजना की राशि गबन करने का मामला सामने आया है। इस मामले में बीडीओ ने वार्ड संख्या 15 की वार्ड सदस्य रुही परवीन व वार्ड सचिव सुल्तान हैदर तथा वार्ड संख्या 17 के सदस्य हसन इकबाल एवं सचिव इम्तियाज अहमद के विरुद्ध राशि गबन के आरोप में थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बीडीओ विमल कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री नलजल योजना के 2019-20 में वार्ड संख्या 15 के वार्ड सदस्य व वार्ड सचिव को 17 लाख 34 हजार तथा वार्ड संख्या 17 के वार्ड सदस्य एवं सचिव को 16 लाख 50 हजार की राशि हस्तांतरण किया गया था। कार्य पूर्ण कराने के लिए कई बार नोटिस भी दी गई, लेकिन इन लोगों ने कार्य पूरा करने का प्रयास नहीं किया। उसके बाद तकनीकी सहायक तथा पंचायत सचिव ने कई बार उनके घर जाकर कार्य संपन्न कराने के लिए प्रेरित किया, पर इनलोगों ने कोई रुचि नहीं ली।