मुजफ्फरपुर [जेएनएन]। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि विज्ञानियों से अपील की कि वे मौसम के अनुकूल फसल को लेकर रिसर्च करें। इससे बाढ़ व सुखाड़ की मार झेल रहे राज्य के किसानों को मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को इसके लिए जागरूक करने का आग्रह किया कि वे कृषि अवशेष को खेतों में नहीं जलाएं। मुख्यमंत्री गुरुवार को जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दूसरे चरण में मिथिलांचल ( समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी जिले) के दौरे पर थे। 

मधुबनी जिले के राजनगर की सिमरी पंचायत में कहा कि जल व हरियाली नहीं रहेगी तो जीवन पर संकट है। इसलिए इस यात्रा पर निकले हैं। मुख्यमंत्री ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि, पूसा के कुलपति डॉ. आरसी श्रीवास्तव के साथ काफी देर विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली योजना का महत्वपूर्ण भाग है मौसम के अनुकूल फसल है। इसलिए जरूरत है कि इसपर अधिक से अधिक रिसर्च हो। 

वनक्षेत्र में तेजी से वृद्धि के लिए जापानी तकनीक जरूरी

मुख्यमंत्री ने सबसे महत्वपूर्ण जापानी पद्धति अकीरा मियावाकी से पौधारोपण की प्रदर्शनी को देखा। कहा कि इस तकनीक से तेजी से वनक्षेत्र में वृद्धि होगी। इस पद्धति से दस गुना कम समय में वनक्षेत्र को विस्तार दिया जा सकता है। पौधों के मिश्रण के अलावा इसमें दो पौधों के बीच की दूरी भी कम होती है। 

अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने पंचायत सरकार भवन को क्रियाशील किया। इसमें सोलर ऊर्जा व रूफ गार्डेङ्क्षनग तकनीक को देखा। कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों व भवनों में अब सौर ऊर्जा से ही काम होंगे। बिहार अब अक्षय ऊर्जा के विकल्प पर काम कर रहा है। उन्होंने भवन में रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम का भी उद्घाटन किया। कहा, यह तकनीक अब सभी भवनों में इस्तेमाल होगी। ताकि, जलस्तर बना रहे। उन्होंने गांव में ही जीर्णोद्धार किए गए तालाब का भी जायजा लिया। कहा कि सभी पोखर, तालाब, आहर, पइन, कुओं का जीर्णोद्धार होगा। सभी जलस्रोतों से अतिक्रमण हटेगा। 

पर्यावरण की सुरक्षा पर किया जा रहा काम

उधर, दरभंगा जिले के बेनीपुर प्रखंड के मुर्तुजापुर गांव में मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों में केवल जलवायु परिवर्तन पर चर्चा ही हो रही है। लेकिन, हमलोगों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। सोचिए, यदि बिहार के लोगों ने इस अभियान को सफल बना दिया तो पूरी दुनिया में इसकी चर्चा होगी। प्राकृतिक जलस्रोतों और पर्यावरण की सुरक्षा दोनों पर ही काम किया जा रहा है। 

कहा कि गंगा नदी के दक्षिण के इलाके में भूजल की स्थिति में गिरावट तो आती रही है, लेकिन इस वर्ष दरभंगा जिले में जलसंकट की बात सामने आई। हमने कहा कि पर्यावरण में हो रहे परिवर्तन के बारे में अब सोचना होगा। इसके बाद जल, जीवन, हरियाली अभियान की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 जनवरी 2020 को रविवार का दिन है। इस दिन जल, जीवन, हरियाली की सफलता के लिए मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। लोगों से आह्वïान किया कि जैसे शराबबंदी के समय मानव श्रृंखला बनाकर रिकॉर्ड बनाया था, वैसे ही जल जीवन हरियाली को लेकर नया कर्तिमान बनाएं।

 अगले साल चुनाव में जाने से पहले तालाब, आहर, पइन, सार्वजनिक कुएं को अतिक्रमणमुक्त कराकर जीर्णोद्धार किया जाएगा। चापाकलों को भी दुरुस्त किया जाएगा। बिजली हर घर पहुंचा दी। खुले में शौच से मुक्ति मिल जाए और स्वच्छ पीने का पानी मिल जाए तो 90 प्रतिशत बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोगों को नल के जल के उपयोग की सलाह दी। कहा कि इसके बाद बढ़ रही आबादी को नियंत्रित किया जाएगा।

 दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी का घनत्व बिहार में है। इसका एकमात्र निराकरण बेटियों को शिक्षित कर ही पूरा होगा। बिहार की हर ग्राम पंचायत में उच्च माध्यमिक विद्यालय बनवाएंगे। ताकि, लड़कियां भी इंटर तक पढ़ लें। तभी प्रजनन दर नीचे जाएगी। अगले वर्ष अप्रैल से हर ग्राम पंचायत में नौवीं क्लास की पढ़ाई शुरू होगी।

समस्‍तीपुर में जंगलाही पोखर का लिया जायजा

समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड के रामापुर महेशपुर में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एक संकल्प ने यहां की तस्वीर बदल दी। पूरा माहौल खुशहाल दिख रहा है। उन्होंने जंगलाही पोखर के जीर्णोद्धार के बाद बदली स्थिति और माहौल का जायजा लिया। साथ ही दो करोड़ 32 लाख, 80 हजार, 479 की लागत से क्रियान्वित योजना का लोकार्पण भी किया।

तालाब के निरीक्षण के दौरान सीएम ने एक-एक बात का नोटिस किया। साथ चल रहे अधिकारियों को कमियों को शीघ्र दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। डीएम शशांक कुमार शुभंकर की कई खामियों को दुरुस्त कराने को कहा। वॉङ्क्षकग ट्रैक पर पेबर्स ब्लॉक आदि लगाने के निर्देश दिए। 

Posted By: Murari Kumar

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