मुजफ्फरपुर। एसकेएमसीएच के प्रसव विभाग की क्षमता 25 बेडों की और भर्ती 155 महिलाएं। इसके अलावा सामान और उनके परिजन भी। जिसे बेड मिल गया वो खुशनसीब, नहीं तो आते-जाते लोगों के बीच फर्श पर ही ठिकाना। कभी-कभी तो वहां भी जगह नहीं मिल पाती। विभाग की पड़ताल में ऐसी ही खामियां सामने आती हैं। उमस भरी गर्मी और दुर्गध से वहां खड़ा होना मुश्किल।

संक्रमण का रहता खतरा : वार्ड में प्रसूताओं का दबाव और कुव्यवस्था के बीच हमेशा जच्चा-बच्चा को संक्रमण का खतरा रहता है। सोमवार को भी ऐसा ही देखने को मिला। कुछ महिलाएं नवजात शिशु के साथ फर्श पर लेटी थीं। गंदे कपड़े, खाने-पीने की सामग्री आदि इधर-उधर पसरी रहती है।

संख्या बढ़ते ही फर्श पर होने लगता कब्जा : अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन तीन दर्जन से अधिक महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। यहां मात्र 25 बेड ही हैं। वार्ड यूं ही फुल रहता है। संख्या बढ़ते ही फर्श पर कब्जा होने लगता है।

36 बेड की क्षमता वाले महिला सामान्य वार्ड 10 व 11 में अक्सर 60 से 70 मरीज भर्ती रहती हैं। स्त्री रोग बाह्य विभाग में नित्य 200 से 300 मरीज इलाज को पहुंचती हैं। हालांकि, बंदी के कारण कुछ भीड़ कम थी।

मरीजों के अनुपात में कर्मियों की कमी : विभाग में कर्मियों की कर्मी है। इसका असर इलाज व व्यवस्था बनाए रखने पर पड़ता है। एक साथ दिन वार्डो के जुड़े होने से समस्या बनी रहती है। डॉक्टर और नर्स के लिए अलग-अलग रूम नहीं होने का भी असर दिखता है।

बीएचटी गायब होना बड़ी समस्या : वार्ड में महिलाओं के साथ उनके परिजनों का जमघट लगा रहता है। ऐसे में कई मरीजों के बीएचटी भी गायब हो जाते हैं। आए दिन हो-हल्ला भी। बाहरी पुरुषों का भी आना-जाना रहता है। वार्ड के विस्तारीकरण का काम जारी है। मरीजों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास चल रहा है। प्रसूता व उनके परिजन की भीड़ असली परेशानी है।

-डॉ. सुनील कुमार शाही

अधीक्षक, एसकेएमसीएच

Posted By: Jagran