दरभंगा, जासं। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मैथिली विभाग में बीटेक पास विद्यार्थियों का नामांकन लेने का मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय नामांकन समिति ने सत्र 2020-22 में नामांकित बीटेक कोर्स के 24 छात्रों का नामांकन रद कर दिया है। स्नातकोत्तर सत्र 2020-22 के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा फार्म भरने के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि संबंधित विद्यार्थी मैथिली से स्नातक पास नहीं हैं। इनकी डिग्री अन्य विषयों की है। जिस कारण इनका नामांकन वैध नहीं माना जाएगा। बता दें कि स्नातकोत्तर मैथिली संकाय में नामांकन के लिए प्रतिष्ठा या आनुषंगिक विषय में मैथिली होना अनिवार्य है।

आनलाइन नामांकन प्रक्रिया में नहीं पकड़ी गई थी गलती

कोरोना संक्रमण काल के बीच स्नातकोत्तर मैथिली विषय सत्र 2020-22 में शुरू हुए नामांकन प्रकिया में तब बीटेक डिग्रीधारियों द्वारा गए गए आवेदन को रद नहीं किया गया। स्टेप-वाइज नामांकन प्रक्रिया में कहीं भी संबंधित 24 बीटेक कोर्स के छात्रों के नामांकन संबंधित पेपर की जांच नहीं की गई।

बीआरए बिहार विवि में छात्रों को दूसरे संकाय और विषय भी नामांकन लेने की मिली है छूट

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने इस बार से छात्रों को दूसरे संकाय और विषयों में भी नामांकन लेने की छूट दी है। दूसरे संकाय से स्नातक करने वाले छा अपना संकाय बदलकर अन्य विषय में भी नामांकन ले सकते हैं।

--स्नातकोत्तर मैथिली विभाग में बीटेक के 24 छात्रों का नामांकन विश्वविद्यालय नामांकन समिति ने रद कर दिया है। साथ ही मैथिली स्नातकोत्तर विभाग के विभागाध्यक्ष को मामले को लेकर स्पष्टीकरण पूछा गया है। -प्रो. विजय कुमार यादव, डीएसडब्ल्यू लनामिवि दरभंगा।

शिक्षक-शिक्षकेत्तर यूनियन ने मानदेय बढ़ोतरी को सीएम को लिखा पत्र

दरभंगा। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिक्षक-शिक्षकेत्तर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार साह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के मानदेय बढ़ोतरी को लेकर पत्र लिखा है। बताते हैं कि बिहार में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का मानदेय अन्य राज्य में कार्यरत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के कर्मचारियों से काफी कम है। शिक्षिका,वार्डेन, लेखापाल, रात्रि प्रहरी, आदेशपाल, रसोइया आदि का मानदेय बिहार में बहु कम है, जबकि झारखंड में उक्त सभी पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को बिहार में कार्यरत कर्मचारियों से दो गुणा अधिक मानदेय मिल रहा है।