BRABU में पीजी के 33 विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा की होगी पढ़ाई, वैल्यू एडेड कोर्स में शामिल
BRABU Muzaffarpur PG Syllabus: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में अब स्नातकोत्तर के 33 विषयों में 'भारतीय ...और पढ़ें

राजभवन की ओर से इस संबंध में सभी कुलपतियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। BRABU Muzaffarpur PG Syllabus: बिहार की उच्च शिक्षा अब अपनी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ेगी।
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर (PG) के 33 विषयों के पाठ्यक्रम में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' को शामिल किया गया है।
इसे पीजी स्तर पर वैल्यू एडेड कोर्स के रूप में पढ़ाया जाएगा।
दो क्रेडिट की होगी पढ़ाई
पीजी के प्रथम सेमेस्टर में विद्यार्थी दो क्रेडिट के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करेंगे। इसके माध्यम से छात्र आधुनिक शिक्षा के साथ भारत के पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान से रूबरू हो सकेंगे।
राजभवन की ओर से इस संबंध में सभी कुलपतियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
18 सितंबर को मिलेगी मंजूरी
पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए बीआरएबीयू में 18 सितंबर को एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट की बैठक बुलाई गई है।
इन वैधानिक निकायों से पाठ्यक्रम को अनुमोदित कराकर रिपोर्ट राजभवन भेजी जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्र इतिहास, विज्ञान, साहित्य सहित 33 विषयों में भारत के प्राचीन योगदान को पढ़ सकेंगे।
इन विषयों को विद्यार्थी पढ़ेंगे
एआइएच एंड सी, अंगिका, रसायनशास्त्र, होम साइंस, मनोविज्ञान, जूलाजी, रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट, बाटनी, बुद्धिस्ट स्टडीज, इलेक्ट्रानिक्स, हिंदी, अर्थशास्त्र, भूगोल, पर्सनल मैनेजमेंट एंड इंडस्ट्रियल रिलेशंस, जियोलाजी, इतिहास, पाली, भौतिकी, प्राकृत एंड जैनोलाजी, बायोकेमिस्ट्री, कामर्स, एजुकेशन, राजनीति विज्ञान, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रूरल इकोनामिक्स, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, गणित, भोजपुरी, गांधियन थाट, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, संस्कृत और अंग्रेजी।
क्या है भारतीय ज्ञान परंपरा
भारतीय ज्ञान परंपरा का सीधा अर्थ भारत के उस ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, कला और तकनीकी कौशल से है जो हजारों वर्षों से इस भूमि पर विकसित हुआ है। लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भारत के मौलिक योगदान (जैसे प्राचीन गणित, धातु विज्ञान, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, और सामाजिक दर्शन) को वह स्थान नहीं मिल पाया जिसका वह हकदार था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य शिक्षा का भारतीयकरण करना है। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि भारत केवल वेदों और उपनिषदों की भूमि नहीं रहा है बल्कि यह तार्किक सोच, वैज्ञानिक प्रयोगों और सतत जीवन शैली का भी वैश्विक केंद्र रहा है।
