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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में एनएसएस प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव, नामांकन के साथ ही होगा चयन

Published: Wed, 27 May 2026 07:34 PM (IST)

BRABU NSS: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने कॉलेजों में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) में स्वयंसेवकों के चयन प्रक्रिया में बदलाव किया ...और पढ़ें

छात्रों को निर्धारित अवधि में कार्य पूरा करने में परेशानी होती थी।

छात्रों को निर्धारित अवधि में कार्य पूरा करने में परेशानी होती थी।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। NSS Admission Process: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में अब राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस में स्वयंसेवकों के चयन की प्रक्रिया में एकरूपता लाई जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है कि अब स्नातक और पीजी में नामांकन के साथ ही एनएसएस में प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।

नामांकन के समय मिलेगा फॉर्म

विश्वविद्यालय की ओर से सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया गया है। नए निर्देश के तहत नामांकन के दौरान इच्छुक छात्र-छात्राओं को एनएसएस का आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा।

विद्यार्थी आवश्यक जानकारी भरकर यह फॉर्म कॉलेज के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी के पास जमा करेंगे। इसके बाद विद्यार्थियों की सामाजिक कार्यों में रुचि और सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता के आधार पर चयन किया जाएगा।

रखना होगा रिकॉर्ड

विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक ने कहा है कि चयनित स्वयंसेवकों का पूरा विवरण अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही सभी रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा।

कॉलेजों को यह विवरण बाद में विश्वविद्यालय को भी भेजना होगा।

प्रमाण पत्र जारी करने में थी परेशानी

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार अब तक विभिन्न कॉलेजों में एनएसएस में प्रवेश की अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। इससे स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र जारी करने में कठिनाई होती थी।

एनएसएस से जुड़े विद्यार्थियों को एक वर्ष में 120 घंटे सामाजिक कार्य करना अनिवार्य होता है। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने से कई छात्रों को निर्धारित अवधि में कार्य पूरा करने में परेशानी होती थी।

समय पर मिलेगा प्रमाण पत्र

विश्वविद्यालय ने कहा है कि सत्र शुरू होने के साथ ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने से स्वयंसेवकों को पूरे वर्ष कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे एक वर्ष पूरा होने पर समय से प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।

कॉलेजों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कार्यक्रम रिपोर्ट, फोटो, उपस्थिति और स्वयंसेवकों की सूची विश्वविद्यालय को भेजनी होगी।

एकरूपता से खत्म होगी परेशानी

विश्वविद्यालय का मानना है कि एक यूनिट में एक साथ रिक्त सीटों पर प्रवेश लेने और सत्रारंभ में ही प्रक्रिया पूरी करने से सूची तैयार करने और प्रमाण पत्र जारी करने की समस्या खत्म हो जाएगी।