मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित होने वाली सत्र-2018-21 के तृतीय वर्ष की परीक्षा में सैंकड़ों विद्यार्थी शामिल नहीं हो सकेंगे। जबकि उन्होंने 2020 में आयोजित हुई द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की है। ये ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिन्होंने 2015 या उससे पहले विवि के कॉलेजों में स्नातक में दाखिला लिया था। विवि की ओर से अभी फॉर्म भरने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें पहली प्रक्रिया में ही नामांकन का वर्ष पूछा जा रहा है। उस कॉलम को भरने के बाद ही उनका विवरण आ रहा है, जबकि 2016 से पूर्व नामांकित विद्यार्थियों का इसमें विकल्प ही नहीं है। ऐसे में पिछले वर्ष द्वितीय वर्ष की परीक्षा देने वाले सैंकडों की संख्या में छात्र-छात्राएं परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि 2016 से पूर्व उनका नामांकन था और उनका रजिस्ट्रेशन वैध नहीं है तो पिछले वर्ष किस परिस्थिति में उनसे द्वितीय वर्ष की परीक्षा ली गई। साथ ही विवि ने परिणाम भी जारी किया। इसपर विवि का कहना है कि उस समय फार्म भरने की प्रक्रिया ऑफलाइन होने के कारण यह मामला पकड़ मे नहीं आया होगा। अब ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने 2016 से पूर्व नामांकन लिया हो उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त हो गया। अब उन्हें फिर से प्रथम वर्ष में नामांकन लेना होगा। कहा गया कि स्नातक में यदि विद्यार्थी प्रथम या द्वितीय वर्ष में प्रमोटेड होते हैं तो उन्हें तृतीय वर्ष की परीक्षा के पूर्व इसे क्लियर कर लेना होता है। ऐसे में उन्हें दो बार अतिरिक्त मौके मिलते हैं। इसके बाद भी यदि कोई छात्र-छात्रा प्रमोटेड हो जाते हैं तो उन्हें फिर से नामांकन लेना होगा।

पोर्टल में गड़बड़ी के कारण परेशान हैं कामर्स के विद्यार्थी

विश्वविद्यालय की ओर से तृतीय वर्ष का परीक्षा फॉर्म भरने के लिए 13 से 20 नवम्बर तक का समय दिया गया था। पहले दो दिनों में पोर्टल खुल ही नहीं सका। इसके बाद खुला तो कामर्स के छात्रों का डाटा पोर्टल पर नहीं दिख रहा है। कालेज से भी डाटा जोड़ने का विकल्प नहीं मिल रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राओं ने फार्म भरने की तिथि बढ़ाने की मांग की है। 

Edited By: Ajit Kumar