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BPSC 70th Result: पूर्व की असफलता का दर्द भुलाकर सुशांक बने रेवेन्यू ऑफिसर

Published: Sun, 21 Jun 2026 02:46 PM (IST)

Bpsc Success Story: मुजफ्फरपुर के सुशांक झा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 593वीं रैंक हासिल कर राजस्व अधिकारी का पद ...और पढ़ें

सुशांक झा ने निरंतरता को अधिक महत्व दिया।

सुशांक झा ने निरंतरता को अधिक महत्व दिया।

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। BPSC 70th Exam: सफलता इस बात से तय नहीं होती कि आप पहली बार में गिरे या नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आप गिरकर कितनी तेजी से खड़े हुए। इस बात को पूरी तरह सच साबित किया है मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा निवासी सुशांक झा ने। 

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के नतीजों में सुशांक ने शानदार वापसी करते हुए 593वीं रैंक हासिल की है। इस रैंक के साथ उनका चयन रेवेन्यू ऑफिसर (राजस्व अधिकारी) के पद पर हुआ है, जिससे पूरे जिले का नाम रोशन हुआ है।

पुणे से स्कूलिंग और IIIT दिल्ली से एमटेक 

संजय कुमार झा और रेखा झा के होनहार बेटे सुशांक का शैक्षणिक सफर शुरू से ही बेहतरीन रहा है। उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय नंबर-3 (BRD), पुणे से और इंटरमीडिएट की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल, पुणे से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बीटेक (B.Tech) किया।

तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा की चाह उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIIT, दिल्ली ले गई, जहाँ से उन्होंने एमटेक (M.Tech) की डिग्री हासिल की।

69वीं में नहीं निकला था प्रीलिम्स

उच्च तकनीकी डिग्री होने के बावजूद सुशांक का लक्ष्य बिहार में प्रशासनिक सेवा के जरिए जमीन से जुड़कर काम करना था। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं थी। अपने पहले प्रयास (69वीं बीपीएससी) में सुशांक को बड़ा झटका लगा, जब वे प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) की दहलीज भी पार नहीं कर पाए। 

लेकिन इस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। सुशांक ने अपनी पुरानी गलतियों का गहराई से विश्लेषण किया, कमजोरी वाले हिस्सों को पहचाना और अपनी पूरी रणनीति को नए सिरे से री-डिजाइन किया।

सेल्फ स्टडी और मॉक टेस्ट 

सुशांक की सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान के भरोसे बैठने के बजाय सेल्फ स्टडी (खुद से पढ़ाई) पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। उन्होंने पूरे सिलेबस को खुद तैयार किया और इतिहास (History) को अपना वैकल्पिक विषय बनाया। 

कोचिंग का सहारा उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी तैयारी को परखने, टाइम मैनेजमेंट सुधारने और सही आकलन करने के लिए मॉक टेस्ट देने में लिया। इसी सटीक रणनीति का नतीजा रहा कि वे अपने दूसरे ही प्रयास में सीधे अधिकारी बन गए।

नए अभ्यर्थियों के लिए सुशांक का सफलता मंत्र

अपनी इस शानदार कामयाबी पर सुशांक ने भविष्य में तैयारी करने वाले युवाओं को बेहद व्यावहारिक सलाह दी है। उनका कहना है कि बीपीएससी जैसी बड़ी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को पास करने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत नहीं होती।

  • निरंतरता और अनुशासन: पढ़ाई में हर दिन की निरंतरता (Consistency) और कड़ा अनुशासन सबसे ज्यादा मायने रखता है।

  • खुद पर भरोसा: कोचिंग से ज्यादा अपनी सेल्फ स्टडी पर भरोसा रखें और रूटीन को टूटने न दें।

  • फिटनेस भी जरूरी: पढ़ाई के लंबे दौर के बीच खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि आप बिना तनाव के बेहतर परफॉर्म कर सकें।