उत्तराखंड में फर्जी आर्म्स लाइसेंस से खरीदे हथियार, मुजफ्फरपुर में सत्यापन के दौरान खुला राज
उत्तराखंड में मुजफ्फरपुर से जारी बताए गए एक आर्म्स लाइसेंस की जांच में वह फर्जी निकला, जिसके आधार पर हथियार ...और पढ़ें

HighLights
उत्तराखंड में फर्जी आर्म्स लाइसेंस से खरीदे गए हथियार।
मुजफ्फरपुर से जारी बताया गया लाइसेंस निकला फर्जी।
जांच में 20 अवैध असलहे और 14 आरोपी गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Fake Arms License: उत्तराखंड में मुजफ्फरपुर से जारी बताए गए जिस आर्म्स लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे गए थे, जांच में वह फर्जी निकला है।
जिला शस्त्र दंडाधिकारी ने इस संबंध में हरिद्वार के एसएसपी को रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मोहन सिंह रावत के नाम से जारी बताया गया आर्म्स लाइसेंस मुजफ्फरपुर से निर्गत नहीं हुआ है।
यह लाइसेंस ओडी पंजी में भी दर्ज नहीं है। इसके बाद आशंका बढ़ गई है कि नगालैंड समेत पूर्वोत्तर राज्यों के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश से जारी फर्जी आर्म्स लाइसेंस के आधार पर भी हथियार खरीदे जा रहे हैं।
हरिद्वार के एसएसपी ने पत्र जारी कर बताया था कि बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए आर्म्स लाइसेंस पर खरीदे गए हथियार जब्त किए गए हैं।
ये लाइसेंस फर्जी प्रतीत हो रहे हैं और मामले की जांच विशेष जांच टीम (एसआइटी) कर रही है। टीम को दूसरे राज्यों से स्थानांतरित होकर आए आर्म्स लाइसेंस का सत्यापन करना है।
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में अब तक चार आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 20 अवैध असलहा, 372 कारतूस और फर्जी आर्म्स लाइसेंस जब्त किए गए हैं। पुलिस ने 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि बदमाशों ने फर्जी आर्म्स लाइसेंस, कूटरचित एनओसी, जाली अभिलेख और अंतरराज्यीय स्थानांतरण प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। इसके जरिए इन लाइसेंसों को उत्तराखंड के आर्म्स रजिस्टर में दर्ज कराया गया।
हरिद्वार एसएसपी के पत्र के बाद मुजफ्फरपुर में भी संबंधित लाइसेंस की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि मोहन सिंह रावत के नाम से जारी बताया गया लाइसेंस जिले से निर्गत नहीं हुआ था और इसका ओडी पंजी में भी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
इस मामले में मोहन सिंह रावत ने बताया था कि वह सेना में कार्यरत थे। उनकी मुजफ्फरपुर में एनसीसी में पोस्टिंग थी और उसी दौरान उन्होंने यह लाइसेंस लिया था।
अब यह विस्तृत जांच का विषय है कि उक्त लाइसेंस कैसे और किसके द्वारा जारी किया गया था। जांच के बाद ही फर्जी लाइसेंस जारी करने और इसके आधार पर हथियार खरीदने से जुड़े पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
