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अयोध्या चंदा चोरी के बीच बिहार में भी भगवान से 'छल', श्रीराम जानकी के नाम की करोड़ों की जमीन बेची

Published: Sun, 19 Jul 2026 12:45 PM (IST)

Bihar Land Revenue Corruption: मुजफ्फरपुर में श्रीराम जानकी सहित अन्य देवी-देवताओं के नाम दर्ज करोड़ों की सरकारी जमीन को भू-माफिया ...और पढ़ें

आस्था के केंद्र को लूटने का यह तरीका अंचल कार्यालय के भीतर बैठकर तैयार किया गया था। (AI Generated Image)

आस्था के केंद्र को लूटने का यह तरीका अंचल कार्यालय के भीतर बैठकर तैयार किया गया था। (AI Generated Image)

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प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। Government Land Registry Fraud: अयोध्या के भव्य राम मंदिर से आए चंदा चोरी के आरोपों ने देशभर के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया था। ठीक उसी तरह की मानसिकता के साथ अब बिहार के मुजफ्फरपुर में भी भगवान के साथ हुआ एक बड़ा छल सामने आया है।

यहां श्रीराम जानकी समेत अन्य देवी देवताओं के नाम पर दर्ज करोड़ों की सरकारी जमीन को रक्षकों ने ही मिलकर बेच डाला।

चोरी का नया पैंतरा

मुशहरी अंचल की भीखनपुर पंचायत में स्थित श्रीराम जानकी एवं अन्य देवी-देवताओं की करीब 17 एकड़ बेशकीमती जमीन का यह पूरा सौदा भू-माफिया और सरकारी कारिंदों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। आस्था के केंद्र को लूटने का यह तरीका अंचल कार्यालय के भीतर बैठकर तैयार किया गया था।

एनएच किनारे महालूट

राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-77 और NH-57) के किनारे स्थित इस बेहद कीमती जमीन की खरीद-बिक्री का खेल साल 2007-08 से ही गुपचुप तरीके से चल रहा था। कई बार स्थानीय लोगों द्वारा आवाज उठाए जाने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर पर्दा डाले रखा, जिससे सौदागरों के हौसले बुलंद रहे।

अधिकारियों की चुप्पी

तकनीकी रूप से इस जमीन की सरकारी रसीद आज भी देवी-देवताओं के नाम पर ही कट रही है, इसलिए इसका दाखिल-खारिज (Mutation) किसी आम व्यक्ति के नाम होना असंभव था। यही वजह थी कि सालों तक अंचल कार्यालय में आने वाले दाखिल-खारिज के आवेदनों को लगातार खारिज किया जाता रहा।

कर्मचारी का नया दांव

साल 2019 में इस पूरे खेल ने तब नया मोड़ लिया जब मुशहरी अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी ने खुद इस बहती गंगा में हाथ धोने का फैसला किया। कर्मचारी ने भगवान के नाम दर्ज इस अकूत संपत्ति में से कुछ हिस्सा सीधे अपने सगे रिश्तेदारों के नाम रजिस्ट्री करवा लिया।

अपनों को रेवड़ी बांटी 

सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 1 जुलाई 2019 को कर्मचारी के एक रिश्तेदार के नाम 3.60 डिसमिल और फिर 19 नवंबर को दूसरे संबंधी के नाम 2 डिसमिल जमीन ट्रांसफर की गई। जैसे ही भगवान की जमीन पर कर्मचारी के अपनों का नाम चढ़ा, सरकारी सिस्टम की सुस्ती अचानक फुर्ती में बदल गई।

दाखिल खारिज का खेल 

जिस जमीन की जमाबंदी और दाखिल-खारिज को 26 अप्रैल 2019 तक अंचल कार्यालय अवैध बताकर खारिज कर रहा था, उसे कर्मचारी के रिश्तेदारों के नाम होते ही तुरंत मंजूरी दे दी गई। 9 अगस्त 2019 को पहली बार भू-माफियाओं के पक्ष में दाखिल-खारिज की फाइल पास की गई।

सीओ की भूमिका संदिग्ध

इस पूरे घोटाले में मुशहरी के तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने राजस्व कर्मचारी की उन सभी फाइलों और संस्तुतियों पर आंख मूंदकर मुहर लगा दी, जिन्हें अंचल कार्यालय पहले नियम विरुद्ध मानकर कई बार रिजेक्ट कर चुका था।

फाइल पर जमी धूल 

इस महालूट की शिकायत मिलने पर राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए थे। मगर हैरानी की बात यह है कि रसूखदारों और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ के कारण यह जांच रिपोर्ट पिछले कई सालों से ठंडे बस्ते में बंद पड़ी है।

अपर समाहर्ता का आश्वासन 

इस गंभीर मामले पर मुजफ्फरपुर के अपर समाहर्ता प्रशांत कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस पूरे जमीन घोटाले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।