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बिहार में 12-15 हजार की मशीन, 75 हजार का बिल! आरओ प्लांट की खरीद पर उठे गंभीर सवाल

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:02 PM (IST)

जदयू ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के स्कूलों में लगाए गए आरओ प्लांट की खरीद ...और पढ़ें

जदयू ने 75 हजार के बिल पर उठाए गंभीर सवाल।

जदयू ने 75 हजार के बिल पर उठाए गंभीर सवाल।

HighLights

  1. जदयू ने आरओ प्लांट खरीद में बड़े घोटाले का आरोप लगाया।

  2. 12-15 हजार की मशीन का बिल 75 हजार तक बनाया गया।

  3. मामले की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच की मांग की गई।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी के कोष से मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के 66 सरकारी विद्यालयों में लगाए गए ड्रिंकिंग वाटर प्यूरीफायर चिलर सिस्टम की खरीद पर जदयू ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा ने आरोप लगाया कि बाजार में 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध मशीन के लिए 75 हजार से एक लाख रुपये तक की राशि की निकासी की गई है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

66 विद्यालयों में 50 लाख तक की अनुशंसा

अभिषेक झा ने सोमवार को जिला कार्यालय में प्रेसवार्ता में कहा कि उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार 66 विद्यालयों में 25 लीटर क्षमता के ड्रिंकिंग वाटर प्यूरीफायर चिलर सिस्टम लगाने के लिए 50 लाख रुपये तक की राशि की अनुशंसा की गई।

इस हिसाब से प्रति सिस्टम औसतन करीब 75 हजार रुपये बैठते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में इसी तरह की मशीन की कीमत 12 से 15 हजार रुपये के आसपास बताई जा रही है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया और भुगतान की जांच जरूरी है।

JDU

स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग

उन्होंने मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में लगाए गए सभी आरओ प्लांटों की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से गहन जांच कराने की मांग की। साथ ही, प्रत्येक प्लांट से आपूर्ति होने वाले पानी की शुद्धता की जांच मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला से कराने की बात कही। उनका कहना था कि जांच से मशीनों की गुणवत्ता, क्षमता और वास्तविक उपयोगिता की स्थिति स्पष्ट होगी।

टेंडर और बीओक्यू सार्वजनिक करने की मांग

जदयू प्रवक्ता ने कहा कि योजनाओं से संबंधित टेंडर और बीओक्यू सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि प्रति आरओ प्लांट की वास्तविक खरीद कीमत और स्थापना पर हुए कुल खर्च की सही स्थिति सामने आ सके। उन्होंने सप्लाई ऑर्डर, मूल बिल, भुगतान वाउचर और गुणवत्ता प्रमाण-पत्रों को भी सार्वजनिक पटल पर लाने की मांग की।

दोषी मिलने पर राशि वसूली की मांग

अभिषेक झा ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट भी आम जनता के सामने रखी जानी चाहिए। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या घटिया सामग्री का उपयोग प्रमाणित होता है, तो दोषी अधिकारियों और संवेदकों से सरकारी राशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

पूरे बिहार में जांच की मांग

उन्होंने कहा कि जांच का दायरा मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत पूरे बिहार में अब तक लगाए गए सभी आरओ प्लांटों की व्यापक वित्तीय और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।

ये रहे मौजूद

प्रेसवार्ता में महानगर अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार सिन्हा, प्रो. शब्बीर अहमद, डा. श्याम कल्याण पासवान, रंजन निषाद, सचिन्द्र कुशवाहा, कुंदन शांडिल्य आदि मौजूद थे।