मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। पिछले 30 वर्षों से बिहार में सामाजिक न्याय व न्याय के साथ विकास की बात करने वालों की सरकार है। पहले लालू प्रसाद यादव उनके परिवार के लोगों ने शासन किया और सीएम नीतीश कुमार शासन कर रहे हैं। दोनों ही विकास व उत्थान की बात करते हैं। समाज को दिशा देने की बात करते हैं, लेकिन राज्य में इन वर्षों में अपने बदतर हालत में चला गया है। ये बातें चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कही है। जनसुराज यात्रा के पूर्व मुजफ्फरपुर पहुंचे प्रशांत किशोर यहां पूर्व उपमेयर सैयद माजिद हुसैन के आवास पर बैठक के दौरान बुद्धीजीवियों से बात कर रहे थे। उन्होंने लोगों को बताया कि किस तरह से ये लोग भावनात्मक मुद्​दों पर वोट हासिल कर जनता को ठग रहे हैं। लोगों से उन्होंने विकल्प को लेकर चर्चा की। साथ ही लोगों की राय भी ली।

किशोर ने कहा कि बिहार 1960 के दशक तक सबसे अच्छे शासित राज्यों में से एक था। इसके बाद चीजें कमजोर हो गईं। 1990 के दशक तक हम सभी विकास सूचकांकों के मामले में सबसे नीचे आ गए। इस अवधि की विशेषता वाली सबसे बड़ी चीज राजनीतिक अस्थिरता थी। राज्य में विकास की रफ्तार धीमी है। पिछले 30 वर्षों में सिर्फ 1200-1300 राजनीतिक परिवारों में से ही विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं। इनका तेजी से विकास हुआ है, शेष लोग पीछ होते चले गए। इस बदहाली से निकलने का रास्ता तीसरा विकल्प है। इसे अपना ही राज्य की जनता अपनी तकदीर बदल सकती है। राज्य की प्रमुख समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

आंकड़ाें की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जदयू की ओर से दावा किया जा रहा है कि उन्होंने राजद के 15 साल के शासन की तुलना में बेहतर शासन दिया है। खासकर कानून व्यवस्था की बात करते हैं, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। राजद जैसा ही जदयू का भी शासनकाल है। शराबबंदी के बाद की स्थिति तो किसी से छुपी हुई नहीं है।  

Edited By: Ajit Kumar