नवलपुर(प. चंपारण), [मोहन मिश्र]। बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मुखिया पद से कम संघर्ष वार्ड सदस्य के पद पर नहीं था। इसका वजह नल- जल, गली- नाली की योजना कराने के लिए वार्ड सदस्य को दी गई जिम्मेदारी है। लोग वार्ड सदस्य के पद को कम लागत और अधिक मुनाफा वाला मलाईदार पद मानने लगे हैं। इसमें काफी हदतक सच्चाई भी है। बावजूद इसके जिले के योगापट्टी प्रखंड के सिसवा बैरागी पंचायत की वार्ड संख्या तीन से वार्ड सदस्य के पद पर कोई चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार, इस पंचायत में एक वार्ड सदस्य का पद रिक्त है। चुनाव नहीं लड़ने की वजह भी हैरत में डालने वाली है। कहा जाता है कि इस वार्ड से जो भी चुनाव जीतता है, उसकी पत्नी की अकाल मौत हो जाती है। अब तक पिछले 15 वर्ष में तीन निर्वाचित वार्ड सदस्यों की धर्मपत्नी की मौत हो चुकी है। इसलिए कोई भी चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है। हालांकि, इसबार यह वार्ड महिला आरक्षित हो गया है। 

एक नामांकन रद हो गया

ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद संतोष मंडल को नामांकन करने के लिए तैयार कराया। वह अपनी पत्नी प्रीति कुमारी का नामांकन कराने को तैयार हुआ, लेकिन परिवारजनों ने विरोध किया। आखिरकार संतोष अपनी पत्नी को अस्पताल में एक रिश्तेदार से मिलने के बहाने बुलाकर प्रखंड कार्यालय में ले गया। किसी तरह से नामांकन दाखिल करा दिया। लेकिन संयोग देखिए अंतिम समय में प्रपत्र में त्रुटि के कारण उसका नामांकन रद हो गया। नामांकन रद होने पर संतोष मंडल की पत्नी प्रीति देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह मंदिर में जाकर पूजा- अर्चना की। मुखिया केदार राम का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान इस वार्ड में ऐसी बातें होने लगी थी। काफी कोशिश किया गया कि कोई चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। पैक्स अध्यक्ष मनोज शुक्ला का कहना है कि जीना-मरना तो प्रकृति के हाथों में है। फिर भी कुछ इस तरह की घटनाएं इस वार्ड में हुईं हैं, जिसको लेकर लोग डर गए हैं और कोई चुनाव लड़ना नहीं चाहता।

इनकी हो गई अकाल मौत

ग्रामीण 2006 से इस वार्ड में बही अंधविश्वास की हवा के बारे में बताते हैं। कहते हैं कि 2006 में वार्ड सदस्य का चुनाव हीरामन यादव लड़े थे और जीत भी गए। करीब दो साल भी नहीं गुजरा था, उनकी पत्नी आशपति देवी की मृत्यु हो गई। 2011 के पंचायत चुनाव में मैनेजर यादव वार्ड सदस्य का चुनाव जीते। एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ था कि उनकी पत्नी अद्या देवी का निधन हो गया। फिर 2016 का पंचायत चुनाव आया, रामचंद्र शर्मा वार्ड सदस्य बने। करीब छह माह भी नहीं बीते थे, उनकी पत्नी सुभावती देवी का देहांत हो गया। अब इस वार्ड में अंधविश्वास जड़ जमा लिया था। इस वजह से उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। तुरंत उपचुनाव की भी घोषणा हो गई। वार्ड संख्या तीन चंद्रौल शुक्लटोला में कोई चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुआ। गांव के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने प्रयास किया। पंचायत की वार्ड संख्या छह चंद्रौल चौबे टोला के कमल साह को बुलाकर निर्विरोध वार्ड सदस्य निर्वाचित करा दिया। एक वर्ष पहले कमल साह की पत्नी हीरामती देवी की भी मौत हो गई। योगापट्टी के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि यह तो पूरी तरह से अंधविश्वास की बात है। मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। अगर ऐसा है तो संबंधित वार्ड में उपचुनाव कराया जाएगा।  

Edited By: Ajit Kumar