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Bihar News : जमीन अपने नाम नहीं तो फार्मर आईडी कैसे बने? खाद के नए नियम से बटाईदार किसानों की बढ़ी मुश्किल

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:51 PM (IST)

नई फार्मर आईडी अनिवार्यता के कारण बिहार के बटाईदार किसानों को खाद खरीदने में भारी परेशानी हो रही है। भूमि ...और पढ़ें

शिवम कृषि केन्द्र मकसुदपुर औराई की दुकान पर बिना फार्मर आईडी के खाद लेने आए किसान।

शिवम कृषि केन्द्र मकसुदपुर औराई की दुकान पर बिना फार्मर आईडी के खाद लेने आए किसान।

संवाद सहयोगी, मुशहरी (मुजफ्फरपुर)। उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए एक सितंबर से फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिए जाने के बाद बटाईदार किसानों की खेती फंस गई है। दूसरी ओर जिन किसानों की अब तक आईडी नहीं बन पाई है, वे भी उर्वरक नहीं खरीद पा रहे हैं।

पहले कालाबाजारी के कारण खाद का मिलना मुश्किल था और अब नए नियम से परेशानी बढ़ गई है। उर्वरक दुकानों पर अभी कतार नहीं दिख रही, बल्कि किसान साइबर कैफे का चक्कर काट रहे हैं। वहां भी मुसीबत कम नहीं। मनमानी राशि लेकर फार्मर आईडी बनाने का खेल शुरू हो चुका है।

किसान राज किशोर सिंह का कहना है कि नए नियम के कारण उर्वरक खरीदने में काफी परेशानी हो रही है। बटाईदार किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है।

सरकार की ओर से लागू किया गया नियम सही है, लेकिन अभी इससे मुसीबत बढ़ गई है। बटाईदार एवं ठेका पर खेती करने वाले किसानों के पास भूमि का स्वामित्व नहीं है। इस कारण फार्मर रजिस्ट्रेशन संभव नहीं है। यह एक गंभीर समस्या है।

बटाईदार किसान नवल सहनी ने बताया किठेका पर खेत लेकर हम सब्जी की खेती करते हैं। फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं रहने के कारण उर्वरक खरीदने में काफी कठिनाई हो रही है। किसी तरह 266 रुपये की यूरिया 350 और डीएपी की बोरी ₹2200 में खरीदी है। अब आगे खेती कैसे करेंगे, यह चिंता बढ़ गई है।

किसान सच्चिदानंद सिंह का कहना है कि खेत में अभी धान और सब्जी की फसल लगी है। पहले ही खरीदारी के कारण समस्या नहीं हुई थी, लेकिन अभी कुछ उर्वरक की बोरी की आवश्यकता है। नए नियम लागू होने के कारण आसानी से मिल पाना संभव नहीं प्रतीत हो रहा है।

उर्वरक विक्रेता राजीव कुमार ने बताया कि दुकान में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है, लेकिन नए नियम व तकनीकी समस्याओं के कारण बिक्री नहीं हो पा रही है। कभी सर्वर नहीं काम करता तो कभी किसानों का अंगूठा पीओएस मशीन पर सत्यापित नहीं हो पाता है। इससे किसान और विक्रेता दोनों परेशान हैं।

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गरीब तबके के किसानों का मोबाइल छोटा, क्यूआर कोड बनाने में दिक्कत

औराई। शिवम कृषि केंद्र औराई के दुकानदार राजकिशोर चौधरी ने बताया कि कई किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। बहुत से किसान बटाईदारी पर खेती कर रहे हैं।

कई किसानों का मोबाइल आधार से लिंक नहीं है, जिससे फार्मर आईडी नहीं बन रही है। जय जवान जय किसान सेवा केंद्र हंसवारा के प्रोपराइटर रजनीश मिश्रा ने कहा कि आनलाइन फार्मर आईडी नहीं रहने से विक्रेताओं को दिक्कत हो रही है। गरीब तबके के कुछ किसानों का मोबाइल आधार से लिंक नहीं है, इस कारण यह समस्या बढ़ रही है।

ससौली के कौशल पासवान ने कहा कि कुछ जमीन बटाई पर है। उनके पास छोटा सा मोबाइल है। फार्मर आइडी के लिए इससे क्यूआर कोड नहीं बन पा रहा है।

विशनपुर के रामसकल सिंह, मेड़ीडीह की मुन्ना देवी, सरहंचिया गांव के रणधीर कुमार, बोरबारा के राम संजोग राय समेत कई लोगों ने बताया कि उनकी फार्मर आइडी नहीं बनी है और रसीद भी नहीं चढ़ी हुई है। इससे खाद नहीं मिल पा रहा है।