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मुजफ्फरपुर में आलू किसानों की बर्बादी: खरीदार नहीं, फसल सड़ रही, लागत निकालना मुश्किल

Published: Sun, 31 May 2026 09:07 PM (IST)

Crop Rotting Bihar: मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड में आलू किसानों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि खरीदार न मिलने ...और पढ़ें

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संवाद सहयोगी, बंदरा (मुजफ्फरपुर)। Muzaffarpur Potato Farmers: जिले के बंदरा प्रखंड के किसानों के लिए आलू उत्पादन आंसुओं का सबब बन गया है। खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत और भारी लागत से उपजाया गया आलू अब किसानों के लिए गले की फांस बन चुका है।

बाजार में उचित मूल्य और खरीदार नहीं मिलने के कारण बड़ी मात्रा में आलू सड़ने लगा है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि किसानों को मजबूरी में अपनी फसल को छांटकर सड़कों और खेतों के किनारे फेंकना पड़ रहा है।

लागत निकालना भी हुआ मुश्किल

रामपुरदयाल गांव के किसान रौशन कुशवाहा और तेपरी के किसान मनीष ठाकुर ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में खेती करना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

महंगे दाम पर बीज, खाद और सिंचाई की व्यवस्था करने के बाद इस बार आलू की पैदावार तो बहुत अच्छी हुई थी, लेकिन बाजार में मांग पूरी तरह ठप होने से अब मूल लागत निकालना भी पहाड़ जीतने जैसा मुश्किल काम हो गया है।

कोल्ड स्टोरेज की कमी से 50% फसल बर्बाद

किसानों ने बताया कि बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में उन्होंने अपनी उपज का कुछ हिस्सा कोल्ड स्टोरेज में रखवाया था, जबकि कुछ हिस्से को घरों में सुरक्षित रखकर दाम बढ़ने का इंतजार कर रहे थे।

लेकिन क्षेत्र में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और संगठित मंडी की व्यवस्था न होने के कारण स्थिति हाथ से निकल गई। अब भीषण गर्मी की मार से घरों में रखा करीब 50 प्रतिशत आलू सड़ने की कगार पर पहुंच गया है, जिसे रोजाना छांटकर फेंकना पड़ रहा है।

बिचौलिए उठा रहे मजबूरी का फायदा

स्थानीय स्तर पर कोई सरकारी खरीद केंद्र या सुदृढ़ विपणन (मार्केटिंग) व्यवस्था न होने का सीधा फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। व्यापारी और बिचौलिए किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर औने-पौने दाम पर आलू खरीदने की पेशकश कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि अगर इस कम कीमत पर आलू बेचा जाता है, तो परिवहन और मजदूरी का खर्च भी जेब से भरना पड़ेगा।

अब छोड़ देंगे आलू की खेती

लाचार और कर्ज के बोझ तले दबे बंदरा के किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। किसानों ने मांग की है कि सरकारी स्तर पर आलू की खरीद सुनिश्चित की जाए और स्थानीय स्तर पर आधुनिक भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) व बड़ी मंडी विकसित की जाए।

किसानों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो भविष्य में इलाके के किसान आलू की खेती से पूरी तरह दूरी बनाने को विवश हो जाएंगे।