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बिहार में हवाई सेवा का नया खाका, मधुबनी-मुंगेर उड़ान योजना से बाहर, मुजफ्फरपुर में बढ़ेगी संभावना

Published: Fri, 22 May 2026 10:21 PM (IST)

बिहार सरकार ने मधुबनी और मुंगेर हवाई अड्डों को उच्च भूमि लागत के कारण उड़ान योजना से हटा दिया है, ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर । राज्य में नये एयरपोर्ट से विमान सेवा शुरू किए जाने को लेकर राज्य सरकार गंभीर हो गई है। संभावना वाले एयरपोर्ट पर काम में तेजी लाने की बात की जा रही।

जहां संभावना कम दिख रही, उसे उड़ान योजना से बाहर भी किया जा रहा है, ताकि अन्य पर केंद्रित किया जा सके। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पिछले दिनों राज्य के सभी एयरपोर्ट की स्थिति को लेकर समीक्षा की गई थी।

पाया गया कि मधुबनी और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की कीमत बहुत अधिक है। साथ ही, यह रिहायशी इलाके में है।

इन जिलों के जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने दोनों एयरपोर्ट को उड़ान योजना से हटाने के लिए भारत सरकार से पत्राचार का निर्देश दिया।

इससे इन दोनों शहरों से विमान सेवा की संभावना फिलहाल समाप्त हो गई है। हालांकि, इसे हेलीकाप्टर संचालन के अनुरूप विकसित कर रखरखाव व उपयोग को सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, नागर विमानन मंत्रालय, भारत सरकार समेत अन्य पदाधिकारियों को समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णय से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा है।

जारी पत्र के अनुसार, मुजफ्फरपुर स्थित पताही हवाई अड्डे से विमान सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने इसपर काम शुरू कराने का निर्देश दिया है। यहां टर्मिनल एवं रनवे का निर्माण होना है।

वहीं, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर और किशनगंज हवाई अड्डे के लिए भी अच्छे संकेत हैं। दोनों के रनवे के विस्तार को कहा गया है। नेपाल सीमा से सटे पूर्वी चंपारण के रक्सौल हवाई अड्डे के लिए 139 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। साथ ही, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ करने का आग्रह किया गया है।

इसी तरह सहरसा हवाई अड्डे के लिए भी जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करने की बात कही गई है। इससे कोसी क्षेत्र से विमान सेवा शुरू होने की संभावना है।

पांच शहरों में व्यवहार्यता अध्ययन

राज्य के पांच शहरों में हवाई अड्डे को लेकर व्यवहार्यता अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद ही इसपरकोई निर्णय लिया जाएगा। इन हवाई अड्डों में मोतिहारी, छपरा, बेगूसराय, भागलपुर और गोपालगंज हैं।

पूर्णिया और देवघर में हवाई अड्डे के चालू होने के कारण ही भागलपुर में व्यवहार्यता का अध्ययन होने की बात कही जा रही है। सोनपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का निर्णय लिया गया है।

इस कारण छपरा और गोपालगंज के लिए इस प्रकार का अध्ययन किया जाएगा। इसी तरह रक्सौल एयरपोर्ट को देखते हुए मोतिहारी के लिए बाद में निर्णय लिए जाने की संभावना है।

इन शहरों को अभी करना होगा लंबा इंतजार

राज्य के कुछ अन्य शहरों में भी हवाई सेवा की संभावना तलाशी जा रही है, मगर उन्हें फिलहाल लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कैमूर, बिहारशरीफ, बक्सर, आरा, जहानाबाद और कटिहार के हवाई अड्डे की जमीन की राजस्व अभिलेख की समीक्षा कर अतिक्रमण हटाने को कहा गया है।

भविष्य में इनके उपयोग की संभावना जताई गई है। हालांकि, रोहतास और कैमूर के बीच भारतमाला हाईवे के निकट भूमि अधिग्रहण कर एयर फील्ड या हैलीपैड के निर्माण के लिए कहा गया है।