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बिहार में टोल का नया सिस्टम, राजस्थान जाएगी टीम; फास्टैग से कटेगा शुल्क

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:30 AM (IST)

बिहार राज्य में व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूली के लिए राजस्थान के सफल मॉडल को अपनाने की तैयारी चल ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. बिहार में व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूली की तैयारी।

  2. राजस्थान के सफल लो-कॉस्ट टोल मॉडल का अध्ययन करेगी टीम।

  3. फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली लागू होगी।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । राज्य के सभी जिलों में स्टेट हाइवे और 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों पर व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूली को लेकर तैयारी चल रही है।

इस नई टोल नीति की बारीकियों को समझने चार सदस्यीय अभियंताओं की टीम राजस्थान जाएगी। राजस्थान में यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसे देखते हुए पथ निर्माण विभाग के अवर सचिव ने आदेश जारी किया है।

उन्होंने कहा कि इसपर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। टीम में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के उप मुख्य अभियंता संजय कुमार सिंह, सहायक अभियंता अमितेश कुमार, पथ निर्माण विभाग के सहायक अभियंता जगजीत कुमार एवं बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक तकनीकी मयंक राज को शामिल किया गया है।

बताया गया कि राजस्थान में पहले से ही लो कास्ट टाेल प्लाजा और फास्ट टैग आधारित इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन का माडल सफल है। उसी माडल को बिहार में लागू करने की बात चल रही है। यह टीम राजस्थान में लगे टोल प्लाजा का भ्रमण करेगी।

वहां टोल कैसे वसूला जाता है, फास्ट टैग सिस्टम कैसे काम करता है, टोल की दरें कैसे तय होती है और वसूली के पैसे का हिसाब कैसे रखा जाता है। इसकी पूरी जानकारी लेगी।

वहां से लौटने के बाद टीम विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर बिहार के लिए टोल नीति का ड्राफ्ट तैयार होगा। मुजफ्फरपुर में स्टेट हाइवे 74 और 86 के अलावा पिलखी पुल, साहेबगंज का बंगरा घाट पुल और मीनापुर के रघई घाट पुल पर टोल वसूली की तैयारी चल रही है।

सरकारी खजाने पर कम होगा बोझ

विदित हो कि स्टेट हाइवे और बड़े पुलों के निर्माण और रखरखाव पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। अभी तक इनका पूरा बोझ सरकारी खजाने पर था।

टोल से जो आय होगी, उसका उपयोग सड़कों की मरम्मत और नए पुलों के निर्माण में होगा। इससे सड़कों की गुणवत्ता बनी रहेगी राजस्थान का लो-कास्ट माडल इसलिए चुना गया है क्योंकि इसमें बड़े-बड़े टोल प्लाजा नहीं बनाने पड़ते, बल्कि छोटे और कम खर्च वाले इलेक्ट्रानिक प्लाजा से ही फास्ट टैग के जरिए पैसा कट जाता है, जिससे जाम भी नहीं लगता।