मुजफ्फरपुर। कन्हौली के बावनबीघा स्थित बाबा नर्मदेश्वर नाथ महादेव मंदिर की काफी प्रसिद्धि है। सावन व महाशिवरात्रि सहित विविध अवसरों पर यहां आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से लोग पूजा-अर्चना के लिए जुटते हैं। सावन में यहां पूरे माह रामायण का मास परायण होता है। महाशिवरात्रि में यहां से भव्य शिव बरात निकाली जाती है, जिसमें कई लोग शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की स्थापना के संबंध में बावनबीघा विकास समिति के सचिव शैलेश केसरी बताते हैं कि पहले यहां चारों तरफ खाली जमीन थी। धीरे-धीरे जब यहां कॉलोनी बसी, तो लोगों ने यहां मंदिर बनवाने का निश्चय किया। पूर्व विधायक नीतीश्वर प्रसाद सिंह ने जमीन दिया। फिर मंदिर निर्माण के लिए कमेटी का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष स्व.कैलाश बिहारी कुंवर व सचिव स्व.महेन्द्र नारायण सिंह बनाए गए। उनके नेतृत्व में मंदिर निर्माण हुआ। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक विन्देश्वरी पाठक ने भी सहयोग दिया। वर्ष 1992 में कार्तिक माह के देवोत्थान एकादशी के दिन शुभ मुहूर्त में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। तब से लोग नित्य यहां पूजा-अर्चना करने लगे। अभी यहां शिव परिवार के अलावा बजरंग बली विराजमान हैं। शिव मंदिर के ठीक सामने मां पार्वती का मंदिर बनवाया जा रहा है।

तैयारी

लोगों का कहना है कि वैसे तो यहां नित्य भगवान भोलेनाथ व अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना होती है। मगर सावन की चारों सोमवारी के दिन काफी लोग जुटते हैं। चारों सोमवारी की रात्रि में तरह-तरह के फल-फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार होता है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन यहां रुद्राभिषेक व हर मंगलवार सुन्दरकांड पाठ होता है। देवोत्थान एकादशी के दिन स्थापना दिवस समारोह का आयोजन होता है। लोग यहां शादी-विवाह सहित विविध शुभ संस्कारों के लिए भी आते हैं।

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