मुजफ्फरपुर, जेएनएन। श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) की पीआइसीयू में मंगलवार को एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) पीडि़त संध्या कुमारी को भर्ती किया गया। वह मोतिहारी से रेफर होकर यहां पहुंची। इसके साथ ही पीआइसीयू में इलाजरत बच्चों की संख्या सात हो गई। जबकि कुल 17 एईएस पीडि़त बच्चे यहां भर्ती हैं। इसमें दस सामान्य शिशु वार्ड-2 में रखे गए हैं। इन बच्चों को स्वस्थ होने के पश्चात पीआइसीयू से स्थानांतरित कर यहां अवलोकनार्थ रखा गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसके शाही ने बताया कि इस वर्ष अब तक 455 बच्चे यहां इलाज कराने के लिए पहुंचे। जिनमें 304 स्वस्थ होकर वापस घर लौट चुके हैं। जबकि 121 बच्चों की मौत हो गई। 

इनका चल रहा इलाज

मोतिहारी की संध्या कुमारी, चकिया की नजमा खतून, मोतिहारी मधुबन के आयुषकुमार, पश्चिमी चंपारण बेतिया के गुलाब साह, सिवाईपट्टी की गुडिय़ा कुमारी, मोतीपुर के सुनील कुमार एवं शिवानी कुमारी यहां इलाजरत हैं। जबकि अन्य दस बच्चों का इलाज सामान्य शिशु वार्ड-2 में चल रहा है। इन बच्चों को दो से तीन दिनों में छुट्टी दे दी जाएगी।

चिकित्सकों की बढ़ी जिम्मेदारी

पटना व दिल्ली की टीम के लौटने के बाद एसकेएमसीएच के चिकित्सकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें अस्पताल के अन्य कार्यों के साथ-साथ पीआइसीयू में भर्ती एवं इलाज को आने वाले बच्चों की विशेष देखरेख करनी होगी। एसकेएमसीएच प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने मरीजों के इलाज में किसी तरह की कोताही नहीं बरतने का स्पष्ट आदेश दिया है।

सात साल में भर्ती व मृत मरीज

एसकेएमसीएच में वर्ष 2012 से वर्ष 2018 तक क्रमश: एईएस से पीडि़त 235, 90, 334, 37, 31, 44 एवं 43 बच्चे पहुंचे थे। इनमें क्रमश: 89, 35, 117,15, 06, 18 एवं 12 की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

संध्या पाली में यूनिट प्रभारी को राउंड देना अनिवार्य

एसकेएमसीएच में बच्चों के बढ़ते बीमारी को देखते हुए शिशु विभाग के सभी यूनिट प्रभारी को संध्या पाली में राउंड अनिवार्य रूप से देने का आदेश प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने दिया है। इसके साथ ही अन्य विभाग के यूनिट प्रभारी को भी इसका पालने करने को कहा गया है।  

Posted By: Ajit Kumar

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