मुजफ्फरपुर, जासं। राज्य में रविवार को पंचायत चुनाव के अंतिम चरण का मतदान समाप्त हो गया। मंगलवार को मतगणना के बाद पंचायत चुनाव संपन्न हो जाएगा। इस बीच एक बड़ी चूक को लेकर अब सवाल उठ रहा है। पंचायत चुनाव में आदर्श आचार संहिता को लेकर सरकार की ओर से यह चूक हुई। यह इसलिए कि तीन चरणों के चुनाव में मैदान में पीडीएस डीलर एवं उनके सगे-संबंधियों के उतरने के बाद भी संबंधित दुकानदारों को राशन का आवंटन किया गया। परिणाम यह हुआ कि पीडीएस दुकानदारों ने उपभोक्ताओं पर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से वोट देने का दबाव बनाया। बड़ी संख्या में वे चुनाव भी जीते। शिकायत सरकार के पास पहुंची तो आदेश जारी किया गया। तब तक राज्य में तीन चरणों के चुनाव समाप्त हो चुके थे। मुजफ्फरपुर में भी दो चरणों में चार प्रखंडों में भी चुनाव हो गए। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने छह अक्टूबर को पत्र जारी किया। इसमें कहा गया कि अगर पीडीएस दुकानदार या उनके सगे संबंधी उम्मीदवार हो तो राशन का आवंटन दूसरे संबद्ध दुकानदार को दिया जाए। इस आदेश के दो दिन बाद ही तीसरे चरण का चुनाव था। ऐसे में अक्टूबर माह तक के राशन का आवंटन हो गया। माना जाए तो इससे पांच चरण प्रभावित हुए। सितंबर में दो एवं अक्टूबर में तीन चरणों के चुनाव हुए। नवंबर माह से ही नियम का पूर्ण रूप से पालन कराया जा सका। इससे संबंधित पीडीएस दुकानदारों का कुछ ना कुछ लाभ मिल गया।

सकरा में दो पीडीएस दुकानदार एवं उनके तीन संबंधी चुनाव जीते

सरकार ने चुनाव में विजयी हुए पीडीएस डीलरों की सूची मांगी है। इसे तैयार किया जा रहा है। कटरा की मतगणना के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं शुरुआती चरण के प्रखंडों में सकरा में सबसे अधिक पांच पीडीएस दुकानदार एवं उनके सगे-संबंधी विजयी हुए हैं। दो डीलर ने चुनाव जीते। मुरौल में एक डीलर एवं दो उनके संबंधी विजयी हुए। इस बारे में पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं हुआ था। विभाग से पत्र आने के बाद ऐसे मामलों में पीडीएस दुकान को नजदीक के दुकानदार से संबद्ध कर दिया गया।  

Edited By: Ajit Kumar