मुजफ्फरपुर, जेएनएन। गर्मी के दिनों में बच्चों को होने वाली बीमारी एक्यूट इंसफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome) पर आगे भी शोध जारी रहेगा। सरकार की ओर से इसकी कवायद चल रही है। जानकारी के अनुसार राज्य स्वास्थ्य समिति की एंटोमोलॉजी टीम ने मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी व पूर्वी चंपारण से कीटाणुओं के सैंपल जुटाए थे। आइसीएमआर की लैब में अब उनके वायरल लोड की जांच चल रही है। एंटोमोलॉजी टीम ने राज्य स्वास्थ्य समिति को जो अपनी रिपोर्ट सौंपी है, उसमें एईएस पर आगे भी शोध जारी रखने की अनुशंसा की गई है। इसके बाद केंद्र सरकार ने अवधि बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। 

 हाई रिस्क जोन में चार प्रखंड 

जानकारी के अनुसार एंटोमोलॉजी टीम की अनुशंसा पर अब मुजफ्फरपुर के कुढऩी, मुशहरी, अहियापुर, पारू, सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर व बाजपट्टी और पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल को हाई रिस्क जोन माना गया है।  इन जगहों पर नियमित शोध चलेगा। 

इस बारे में  सिविल सर्जन डॉ.एसपी सिंह ने कहा कि एईएस के कारण की जांच के लिए शोध चल रहा है। राज्य या केंद्र सरकार की ओर से जो भी टीम आ रही, उसे सहयोग किया जा रहा है। वैसे इस साल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज होने से बड़ी संख्या में बच्चों को बचाया गया है। 

इस साल 76 बच्चों में एईएस की हुई पुष्टि, 11 की हो चुकी है मौत 

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ.सुनील कुमार शाही ने बताया कि इस साल अब तक एईएस पीडि़त बच्चों की संख्या 76 हो गई है। इनमें इलाज के दौरान 11 बच्चों की मौत हो गई थी। 56 बच्चों में ज्ञात और 20 में अज्ञात एईएस की पुष्टि हुई है। वहीं बुधवार को एसकेएमसीएच में इलाज करा रहे दो बच्चों में एईएस की पुष्टि हुई है। इनमें पूर्वी चंपारण के  झिटकहियां के पवन सहनी का आठ वर्षीय पुत्र धीरज कुमार व कोटवा के राजकिशोर यादव की ढाई वर्षीया पुत्री गुंजा कुमारी हैं। विशेष वार्ड में दोनों का इलाज चल रहा है। शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने बताया है कि पैथोलॉजिकल जांच रिपोर्ट के आधार पर दो बच्चों में एईएस की पुष्टि हुई है। दोनों बच्चे पूर्वी चंपारण से रेफर होकर एसकेएमसीएच पहुंचे थे। उनका इलाज चल रहा है। हालत गंभीर बनी है। 

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