मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विभागों और इससे जुड़े कालेजों में नई शिक्षा नीति के अंतर्गत एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से इसको लेकर विवि को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई छात्र-छात्रा उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए नामांकन लेती है तो उसका एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स में खाता खुलेगा। अध्ययन के साथ ही उसमें अंक जुड़ते रहेंगे। यदि बीच में किसी कारणवश विद्यार्थी की पढ़ाई छूट जाती है तो उसकी क्रेडिट खाते में सुरक्षित रहेगी। यदि विद्यार्थी संकाय या विषय बदलता है तो उसमें भी इस क्रेडिट का उपयोग कर सकेंगे। इसके लागू होने से ग्रास इंरालमेंट रेसियो (जीईआर) में सुधार होगा। इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआइटीवाई) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) की ओर से डिजिलाकर फ्रेमवर्क के तहत एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफार्म को विकसित किया गया है। इसमें नामांकन के समय छात्र-छात्राएं स्वयं से या संस्थान से खाता खोल सकेंगी। संबंधित संस्थान की ओर से छात्र के नामांकन का सत्यापन होगा। साथ ही प्रत्येक माह संस्थान छात्र-छात्राओं की नियमितता का रिकार्ड उसपर दर्ज कराएगा।

स्नातक, पीजी व डिप्लोमा कोर्स में भी यह प्रभावी :

विवि की ओर से संचालित स्नातक, पीजी और डिप्लोमा कोर्स के लिए भी यह प्रभावी होगा। एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स (एबीसी) उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की ओर से अíजत एकेडमिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से संग्रहित करेगा। पात्रता आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उच्च शिक्षण संस्थान विभाग के आधिकारिक वेबासाइट पर जाकर अकादमिक बैंक आफ क्रेडिट के साथ पंजीकरण करेंगे। छात्र स्वयं से भीएबीसी की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया निर्देशों के साथ एबीसी पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। विवि को कहा गया है कि सभी छात्र-छात्राओं को इसके बारे में जानकारी दें। एबीसी सुविधा के लिए जागरूक करें और उन्हें अकादमिक बैंक खाता खोलने के लिए प्रोत्साहित करें।

Edited By: Jagran