समस्तीपुर, जासं। शहर के बस्तियों में बनाई गई नालियां पानी अभी भी पानी से लबालब है। तंग बस्तियों में बनी संकरी नाली कचरों से पटी है। स्वच्छता और जलनिकासी के नाम पर राशि की निकासी हो रही है लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। कुछ जगहों में नालियों की सफाई तो की जा रही किंतु नाली से निकाले गए कचरे को नहीं उठाने के कारण फिर से वह नाली में गिर जाता है। जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़े नालों की साफ-सफाई पर अपनी ताकत झोंक दी है। कई जगहों पर सफाई का एक दौर पूरा भी कर लिया गया, लेकिन बस्तियों में जल निकासी के लिए बनाई गई नालियां स्वच्छता के अभाव में जगह- जगह जाम हो चुकी है। इससे उत्सवी त्योहार का रंग भी फीका पड़ गया है। बीएड कॉलेज समेत आसपास के इलाके में जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हो रही है। आरएनएआर महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं काे पठन पाठन में काफी कठिनाईयों का समाना करना पड़ रहा है। जबकि जलनिकासी के लिए अबतक नगर निगम के द्वारा 90 लाख से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उत्तरी-दक्षिणी दिशा में सड़क किनारे लाखों रुपये खर्च कर बने नाले का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। हल्की बारिश में भी नाला जाम होने के कारण उफनाने लगता है। मुश्किलें उस समय बढ़ जाती है जब अधूरा नाला सर्विस लेन तक को चपेट में लेकर कई दिनों तक राहगीरों को आवागमन में दिक्कत पैदा कर देता है।

गलियों से लेकर सड़कें तक बन गईं तालाब

बीएड कॉलेज रोड : हर बार की तरह इस बार भी बारिश की पानी से बीएड कॉलेज रोड सड़क पर एक से डेढ़ फुट पानी अभी भी भरा है। नाले का पानी सड़कों पर बहने के कारण लोग पैदल निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। दो और चार पहिया वाहन भी पानी को चीरते हुए ही निकलती है।आरएनएआर कॉलेज रोड:श्रीकृष्णापुरी मोहल्ला स्थित आरएनएआर कॉलेज रोड में दो से तीन फीट तक पानी भर गया। रोड किनारे बने मकानों तक में गंदा पानी प्रवेश कर चुका है। जलभराव के बावजूद शिक्षक कॉलेज आने को मजबूर हैं।

बिना मानक बनाए गए नाले जलनिकासी में अक्षम

शहर में जलनिकासी की व्यवस्था का बुरा हाल है। यहां वर्षों पूर्व बनी व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। लाखों खर्च कर बगैर आउटलेट के नालियों का निर्माण कराया गया। जल निकासी के लिए बेदम नालों की उड़ाही पर लाखों खर्च किए गए मगर, समस्या के स्थाई समाधान की बात हवा-हवाई साबित हो रही है। हाल ही में नगर विकास एवं आवास विभाग के द्वारा मुख्यमंत्री नाली-गली योजना के माध्यम से लाखों रुपये खर्च कर वार्डों में नाला निर्माण कराया गया। लेकिन, बिना मानक बनाए गए नाले जलनिकासी में अक्षम साबित हो रहे। इसके पूर्व भी शहर में जलनिकासी के लिए दर्जनों बार ड्रैनेज प्लान बना, लेकिन एक भी जमीन पर नहीं उतरा। शहरी विकास का कार्य सिर्फ फाइलों में रेंग रही है।

निगम के प्रयास पर फिर रहा पानी

शहर में जमा पानी निकालने में नगर निगम पूरी ताकत से लगा है। जगह जगह मोटर पंप लगाकर लगातार गली मोहल्लों से पानी निकाला जा रहा है। लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। निगम जितना पंप सेट लगाकर पानी निकालता है फिर से वह भर जाता है। शहर में जमा पानी निकालने के लिए कई स्थानों पर आउटलेट बनाए गए। नगर निगम द्वारा इस वर्ष जलनिकासी में करीब 90 लाख से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन समस्या बरकरार है।

जलभराव वाले इलाके में लगाए गए मोटर पंप

जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम को कड़ी चुनौती मिल रही है। जलभराव वाले इलाके में कई मोटरपंप लगाए गए हैं। इसमें 80 एचपी के पांच, 70 एचपी के दो समेत कई छोटे छोटे मोटर पंप लगाए गए हैं। मगरदही और धर्मपुर बांध के निकट 100 एचपी के दो स्थाई मोटर पंप हैं। इसपर भी प्रतिदिन 25 से 30 हजार का खर्च आया। 

Edited By: Ajit Kumar