मुजफ्फरपुर। समस्तीपुर जिले के 250 विद्यालयों में लगे चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं है। इसके पानी में भारी मात्रा में अवांछित तत्व पाए गए हैं, जो शरीर के लिए काफी नुकसानदायक हैं। इसका पर्दाफाश लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा विद्यालय के पेयजल जांच रिपोर्ट में हुआ है। पीएचईडी ने विभिन्न प्रखंड के करीब 400 सरकारी विद्यालयों से पानी का सैंपल लेकर जांच को भेजा था। जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि सैंपल लिए गए विद्यालयों में से 250 स्कूलों का पानी कहीं से पीने योग्य नहीं है। जांच में पटोरी, विद्यापतिनगर, मोहिउद्दीनगर एवं मोहनपुर के अधिकांश विद्यालयों का पेयजल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक करार दिया गया। इन चापाकलों से निकलने वाली पानी में आयरन, फ्लोराइड, क्लोरीन जैसे तत्व खतरनाक स्तर पर पाये गए हैं। जिसके उपयोग से कई प्रकार की गंभीर बीमारी हो सकती है। इतना ही नहीं उस क्षेत्र में आर्सेनिक की मात्रा भी काफी मिली। आर्सेनिक युक्त पानी के सेवन से होती है कई बीमारियां

डॉ. एके आदित्य बताते हैं कि आर्सेनिक युक्त पानी के सेवन से शरीर में कई बीमारियां होती है। इससे त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय का कैंसर भी होता है। आर्सेनिक का वैसे कोई अलग स्वाद, रंग या गंध नहीं होता है। सही तरीके से संरक्षित करने के बाद जांच में पता चलता है कि पानी में आर्सेनिक है या नहीं। वैसे शरीर पर यदि खुददुरे चकता बने, हथेली एवं तलवे की चमड़ी मोटी हो जाए और उसपर गांठ बनने लगे, अंगुली व अंगूठा सड़ने लगे तो समझना चाहिए कि आर्सेनिक युक्त पानी का असर है। तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। अधिकारी ने कहा

जिला शिक्षा पदाधिकारी सत्येंद्र झा ने कहा कि सरकार के सात निश्चय योजना के तहत हर विद्यालय के बच्चों को स्वच्छ पानी मिले इसके लिए विभागीय स्तर पर कोशिश की जा रही है। हमारी कोशिश है कि कोई भी छात्र शुद्धपेयजल से वंचित न रहने पाएं।

Posted By: Jagran

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