मुजफ्फरपुर, आनलाइन डेस्क। Bihar Assembly by-election 2021: बिहार कांग्रेस (Bihar Congress) के प्रभारी भक्त चरण दास ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राजद (RJD)और कांग्रेस के गठबंधन के टूटने का ऐलान कर दिया है। यूं तो इसकी कई वजहें मानी जा रही हैं, लेकिन इसका तात्कालिक कारण कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar)का कांग्रेस में शामिल होना माना जा रहा है। आगामी 30 अक्टूबर को बिहार विधानसभा की दो सीटों के लिए होने जा रहे उपचुनाव के लिए अभी प्रचार चल रहा है। राजनीतिक प्रेक्षकों के साथ-साथ बिहार की जनता भी तेजस्वी व कन्हैया को चुनाव मैदान में टकराते हुए देखना चाह रही है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अभी तक इससे बचते दिख रहे हैं। तारापुर और इसके बाद कुशेश्वरस्थान की नुक्कड़ सभाओं में उन्होंने कन्हैया कुमार और चिराग पासवान (Chirag Paswan)के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। इसके विपरीत बिहार पहुंचते ही कन्हैया कुमार ने सदाकत आश्रम की सभा के दौरान बिना नाम लिए लालू प्रसाद यादव व तेजस्वी यादव पर हमले किए। राजद व भाजपा (BJP) पर अघोषित समझौत के आरोप लगाए। जाति विशेष की राजनीति करने और वंशवाद के आरोप लगाए। 

इसके उलट तेजस्वी यादव ने संयम का परिचय दिया है। उन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से केवल और केवल सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar)पर ही हमला किया है। चिराग और कन्हैया कुमार का नाम तक नहीं लिया है। शुक्रवार की ही बात करें तो कुशेश्वरस्थान की सभा के दौरान प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था अच्छी होती तो दो-दो विधायकों का असमय निधन नहीं होता। कुशेश्वरस्थान के विधायक शशिभूषण हजारी एवं तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी असमय नहीं जाते। कहा कि सरकार की स्वास्थ्य सेवा अच्छी होती तो शशिभूषण हजारी को दिल्ली एवं मेवालाल चौधरी को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती नहीं होना पड़ता।

उन्होंने नीतीश कुमार बेईमानी से सत्ता पर काबिज होने का फिर से आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले चुनाव में जनता ने हमें वोट दिया, लेकिन नीतीश कुमार एवं उनके अधिकारियों ने बेईमानी कर एक दर्जन से अधिक सीटों पर हमारे उम्मीदवारों को हरा दिया। महंगाई बेतहाशा बढ़ी है। जहां पेट्रोल और डीजल ने सेंचुरी लगा दी है, वहीं सरसों तेल ने दोहरा शतक मार दिया है। रसोई गैस की कीमत हजार पार कर गई है। बेरोजगारी का आलम यह है कि लोग रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं। 15 वर्षों से यहां डबल इंजन की सरकार है। प्रधानमंत्री उनका, मुख्यमंत्री उनका, सांसद उनका और विधायक भी उनका है, लेकिन अबतक कुशेश्वरस्थान का विकास नहीं हो पाया है।

तेजस्वी यादव कांग्रेस या कन्हैया पर कुछ भी बोलने से क्यों बच रहे हैं, इसके बारे में सीधे तौर पर तो कुछ भी नहीं कहा जा रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि यदि राजद यह दोनों सीट हासिल कर ले और इसके बाद यदि सरकार बनने की संभावना दिखती है तो यह बिना कांग्रेस के संभव नहीं है। शायद यही वजह उनके बचने की हो सकती है। 

Edited By: Ajit Kumar