मुजफ्फरपुर, जासं। रमजान का 29 रोजा बुधवार को मुकम्मल होगा। इसको लेकर मदरसों एवं खानकाहों से ईद का चांद देखने की अपील की गई है। बुधवार को चांद नजर आया तो गुरुवार को ईद-उल-फितर की नमाज अदा होगी। चांद नजर नहीं आने पर शुक्रवार को ईद मनाया जाएगा। मदरसा जाम-ए-उल उलूम के मोहतमिम हाजी मौलाना आले हसन, खानकाह व इदारे तेगिया के सज्जादानशीं अल्हाज शाह अलवीउल कादरी ने कहा कि बुधवार को चांद नजर आने पर ही गुरुवार को ईद की नमाज अदा की जाएगी। 

देश को बचाने की खातिर ईद की खुशियां भी कुर्बान

मुजफ्फरपुर : रोजेदारों ने देश को बचाने की खातिर ईद जैसी खुशियों को भी कुर्बान करने का जज्बा दिखाया। रोजेदारों ने कहा कि हमारा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, हजारों लोगों की मौत हो रही है। हर कोई दहशत में है। इन मौतों ने ईद की खुशियों को फीका कर दिया है। जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है ऐसी स्थिति में हर जिम्मेदार नागरिक का फर्ज है कि देश पर आए इस मुसीबत के समय खुद से ज्यादा देश की फिक्र करे। रोजेदारों ने कहा कि देश व देशहित में इस बार भी ईद की खुशियां कुर्बान कर देंगे। देश सलामत रहे यहीं दुआ है। हमें गम नहीं कि हमारे बच्चों ने नए कपड़े पहने या नहीं, हमें इसकी भी फिक्र नहीं की ईद की खुशियां भी घर की चहारदिवारी तक सिमट जाएगी। हमें सिर्फ अपने देश को बचाने की फिक्र है।

नए कपड़े का मलाल नहीं, पुराने कपड़ों में ही खुशियां

लॉकडाउन की वजह से दुकानें बंद हो चुकी हैं। ऐसे में अधिकतर लोग अपने परिवार के लिए कपड़ा नहीं खरीद सके हैं। इसके बाद भी उन्हें मलाल नहीं। ऐसे लोगों का कहना है नए कपड़े का मलाल नहीं है, पुराने कपड़े में ही खुशियां हैं। बच्चे नए कपड़े के लिए जिद तो करेंगे, मगर उन्हें भी समझा लेंगे। देश के हालात ठीक नहीं, ऐसे में सुरक्षा सबसे अहम है। ईद एक महीने रोजा रखने का ईनाम है। इस दिन रोजेदार अल्लाह के मेहमान होते हैं। रोजेदारों ने एक महीने रोजा रखकर अल्लाह से कोरोना से निजात की दुआ की। इस दौरान गाइडलाइन का पालन किया गया।  

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