बगहा (पश्चिम चंपारण), जासं। कोरोना संक्रमण के कारण वीटीआर में पर्यटकों के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी। जंगल सफारी को आगामी आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है। गृह विभाग के निर्देश पर सख्ती से इसका पालन करने की हिदायत दी गई है। पर्यटकों पर रोक से वीटीआर को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान होगा। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए गाइडलाइन के तहत जंगल सफारी बंद रहेंगे। वीटीआर में वन्य जीवों, को देखने के लिए बड़ी संख्या में रोजाना पर्यटक आते हैं। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान जंगल सफारी को पूरी तरह से पर्यटकों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। जिसे गाइडलाइन के तहत 11 नवंबर खोला गया था।

प्रवेश द्वार पर सूचना चस्पा

वीटीआर के प्रवेश द्वार पर पर्यटकों के लिए सूचना चस्पा कर दिया गया है। जिसमें आगामी आदेश तक बंद रहेगा लिखा हुआ है। वन्य जीवों की देखभाल तथा पर्यटकों को घुमाने का काम करने के लिए प्रमंडल दो में करीब 370 कर्मचारी तैनात हैं। वीटीआर में वन कर्मी रोजना की तरह अपना काम करेंगे। वीटीआर सिर्फ पर्यटकों के लिए बंद रहेगा।

इस बाबत वाल्मीकिनगर रेंजर महेश प्रसाद ने बताया कि कोरोना संक्रमण दोबारा तेजी से फैल रहा है, ऐसे में एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। इससे लाखों रुपये के राजस्व के क्षति होने का अनुमान है।

बुकिंग निरस्त करा रहे

वीटीआर बंदी के आदेश के बाद से पर्यटकों ने वीटीआर घूमने के लिए होटल-रिजॉर्ट में की गईं बुकिंग को निरस्त करना शुरू कर दी गई है। इससे होटल कारोबारियों में निराशा है। इस बाबत होटल व्यवसायी प्रदीप जायसवाल ने बताया कि वीटीआर बंदी का असर कारोबार पर पड़ रहा है। होटलों की बुकिंग निरस्त हो रही है । एक बार फिर जंगल की सैर कराने वाले जिप्सी चालक व गाइड पर बेरोजगारी का संकट आया है। ऐसे में जंगल सफारी पर निर्भर रहने वाले दो दर्जन से ज्यादा गाइड व जिप्सी चालकों पर बेरोजगारी की तलवार लटकने लगी है।

पिछले साल वीटीआर ने झेला था संकट 

पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण की शुरुआत होते ही अप्रैल माह से महीनों के लिए जंगल सफारी बंद की गई थी। जिसके कारण गाइड व जिप्सी चालकों पर भूखे रहने की तक नौबत आ गई थी। जैसे-तैसे नवंबर महीने से जंगल सफारी शुरू होने से थोड़ी राहत मिली थी। इस बार फिर अप्रैल महीने से कोरोना संक्रमण में तेजी आई है। जिसके कारण वीटीआर बंद करने की घोषणा की गई है।

वन कर्मियों के अवकाश पर रोक

गोबर्द्धना, संसू: कोरोना के संक्रमितों की तेजी से बढ़ती संख्या को लेकर मुख्यमंत्री ने पूरे सूबे में नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। जिसका सीधा असर अब वीटीआर के जंगलों पर दिखने लगा है। नतीजा सोमवार को रघिया समेत गोबर्द्धना वन कार्यालय सुनसान रहा। वन प्रशासन ने जंगल प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दिया है। इस आदेश में जंगल सफारी और ईको हट की सेवा भी शामिल रहेंगे। इसके अधिकारी कोरोना के दुष्परिणामों को देखते हुए वनकर्मियों के अवकाश देने पर भी सख्ती बरत रहे है। बाहरी लोगों से इनके मिलने जुलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। नोटिस के माध्यम से इसकी सूचना कार्यालय के प्रवेश द्वार पर चस्पा कर दिया गया है। जिससे मुख्य द्वार पर पहुंचते ही पर्यटकों को यह सूचना आसानी से मिल सके।

हालांकि ये सूचना प्रकृति से जुड़े इसके प्रेमियों के लिए बेहद दुख से भरा है। लंबे अंतराल तक वे जंगल जाने से दूर रहेंगे। इस संबंध में प्रदीप टेरसियस, समाजसेवी बेचू यादव बताते है कि पूरे देश में कोरोना का ग्राफ बेहद तेजी से बढ रहा है। इस वजह से वन अधिकारियों का जंगल प्रवेश पर रोक का फैसला उचित है। इस बाबत रघिया वन कार्यालय के रेंजर रहीमुद्दीन अहमद ने बताया कि अगले आदेश तक जंगल में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वनकर्मियों को भी अवकाश देने पर रोक लगाई गई है। कर्मियों को बाहरी लोगों से संपर्क नहीं बनाने का निर्देश दिया गया है।

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