मुजफ्फरपुर, जेएनएन। शिक्षाविदों को नई शिक्षा नीति का गहन अध्ययन करना चाहिए। इसमें वर्णित ङ्क्षबदुओं में कोई त्रुटि हो तो उसपर सवाल उठाएं व अपने सुझाव दें, ताकि यह नीति और समृद्ध बन सके। देश तभी आत्मनिर्भर बनेगा जब छात्र आत्मनिर्भर बनेंगे और यह शिक्षा की बदौलत ही संभव हो सकेगा। ये बातें सोमवार को बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहीं।

 उन्होंने कहा कि यदि एक विश्वविद्यालय एक जिले को एडॉप्ट कर ले तो पांच वर्षों में उच्च शिक्षा बड़े मुकाम तक पहुंच सकेगी। नई शिक्षा नीति में ऑफलाइन, ऑनलाइन के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया गया है। ये छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में काफी मददगार होगी। मुख्य वक्ता भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. वीके मल्होत्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। 

 इससे पूर्व वेबिनार का शुभारंभ बाल्मीकि पांडेय ने सरस्वती वंदना से किया। संचालन व स्वागत भाषण  प्रो. प्रमोद कुमार ने किया। अध्यक्षता बीआरए बिहार विवि के कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय ने की। धन्यवाद ज्ञापन लंगट ङ्क्षसह महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक राजेश्वर कुमार ने किया। वेबिनार में प्रतिकुलपति प्रो. रवींद्र्र कुमार, डीन प्रो.गोविंद झा, प्रो. सीकेपी शाही, डॉ.  अमिता शर्मा, प्रो. मो. नसीम, प्रशांत वर्मा व प्रो. ललित किशोर ने भी हिस्सा लिया। 

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