समस्तीपुर [मुकेश कुमार]। रेल पुलों पर नदियों का जलस्तर मापने के लिए मीटर गेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे नई तकनीक वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम से मापा जाएगा। सेंसर युक्त इस नए उपकरण से जलस्तर की पूरी जानकारी मिल सकेगी। सिस्टम से जुड़े अधिकारियों के मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भी आता रहेगा। पूर्व मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण नदियों पर बने पुलों पर इसे लगा दिया गया है। कुछ और पर लगाने का काम चल रहा। 

 पहले पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता किया जाता था। इसमें तत्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थीं। वाटर लेवल रीङ्क्षडग में भी त्रुटि की संभावना होती थी। रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे का आकलन मुश्किल भरा होता था। इसी का नतीजा होता कि बाढ़ का पानी ट्रैक पर भी आ जाता था। लेकिन, आधुनिक सिस्टम के इस्तेमाल से निगरानी आसान होगी। 

इस तरह काम करता है सिस्टम 

वरिष्ठ मंडल अभियंता (समन्वय) आरएन झा ने बताया कि नदियों के जलस्तर को मापने की पारंपरिक गेज पद्धति को खत्म किया जा रहा है। उसकी जगह आधुनिक वाटर लेवल मॉनीटङ्क्षरग सिस्टम लगाया जा रहा है। सेंसर युक्त यह सिस्टम सौर ऊर्जा से संचालित होता है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इसमें एक चिप लगा रहता है। उसमें पुल से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक और रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर दर्ज रहते हैं। पुल पर जलस्तर बताने वाले स्केल को सेंसर सिस्टम रीड करता रहता है। जब जलस्तर खतरे के निशान से बढ़ता या घटता है तो स्वत: संबंधित इंजीनियरों व अधिकारियों को एसएमएस भेजता है। 

इन जगहों पर लगाया गया

समस्तीपुर रेलमंडल के मानसी-सहरसा खंड स्थित कोसी नदी के पुलों पर इस सिस्टम का उपयोग हो रहा है। समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड में बूढ़ी गंडक और बागमती के पुल पर नए सिस्टम से काम हो रहा। इनके अलावा अन्य महत्वपूर्ण पुलों पर भी लगाने की प्रक्रिया चल रही।

मंडल अभियंता ने बताया कि वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम खराब मौसम और रात के लिए उपयुक्त है। कई बार देर रात नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, ऐसे में अलर्ट सिस्टम होने से त्वरित जानकारी मिल सकेगी। ।  

Posted By: Murari Kumar

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