मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने मंगलवार को हाई सिक्यूरिटी फीचर्स से लैस प्रोविजनल प्रमाणपत्र जारी कर दिया। एलएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ.ओपी राय और और आरबीबीएम कॉलेज की प्राचार्य डॉ.ममता रानी को कुलपति ने सर्वप्रथम प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान किया। कुलपति डॉ.आरके मंडल ने बताया कि विद्यार्थियों को अंकपत्र के साथ प्रोविजनल मिले इसको लेकर विवि ने पूरा जोर लगा दिया। ताकि विद्यार्थियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। विद्यार्थी अंकपत्र मिलने के बाद नौकरी या कहीं नामांकन लेने के लिए प्रतिदिन विवि का चक्कर काटते थे। अब उन्हें कॉलेज में ही अंकपत्र और प्रोविजनल सर्टिफिकेट साथ-साथ मिल जाएगा। इसके लिए विद्यार्थियों को अलग से कोई शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी। इससे विद्यार्थियों की कई समस्याओं का समाधान एक साथ हो जाएगा। साथ ही वित्तीय क्षति से बच पाएंगे। कुलपति ने बताया कि विवि में फ्रेंडली माहौल बनाया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रमाणपत्र के लिए भटकना नहीं पड़े। बताया कि इस प्रमाणपत्र का नकल नहीं हो सके इसके लिए कई फीचर्स इसमें जोड़ा गया है। परीक्षा नियंत्रक डॉ.मनोज कुमार ने कहा कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट कॉलेजों को भेजा जा रहा है। उन्होंने विभिन्न कॉलेज के प्राचार्यो से भी अपील की कि इसे विवि से प्राप्त कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएं। ताकि उन्हें परेशानी नहीं हो। कुलपति के आवासीय कार्यालय में प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करने के दौरान डीएसडब्ल्यू डॉ.अभय कुमार सिंह, इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेज डॉ.प्रमोद कुमार, डॉ.सतीश कुमार, डॉ.ललित किशोर समेत अन्य प्राध्यापक मौजूद थे। - प्रोविजनल सर्टिफिकेट की ये हैं खास बातें

- प्रमाणपत्र के बाई ओर बार कोड अंकित किया गया है। इसे स्कैन करते ही प्रमाणपत्र का पूरा विवरण आ जाएगा।

- दायीं ओर ऊपर में विवि का सील है।

- नीचे कुलसचिव का डिजिटल हस्ताक्षर है।

- उसके बगल में परीक्षा नियंत्रक का इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर है।

- टेबुलेटर का मूल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र पर अंकित किया गया है।

- बैकग्राउंड में विवि का वाटर मार्क और बीआरएबीयू लिखा है।

- प्रमाणपत्र पर पहली बार रौल कोड और रौल नंबर और विषय भी दर्शाया गया है। यह होती थी परेशानी :

- बार कोड और इन हस्ताक्षरों के नहीं होने के कारण डुप्लीकेट प्रमाणपत्र आसानी से बनाया जा सकता था।

- रौल कोड और रौल नंबर और विषय अंकित नहीं रहने के कारण जॉब के लिए वेरीफिकेशन के समय विद्यार्थियों को परेशानी होती थी।

- विवि का चक्कर काटना पड़ता था।

- प्रोविजनल के लिए अलग से चालान कटाना पड़ता था और ऑनलाइन के लिए साइबर कैफे में भी पैसे देने पड़ते थे।

Posted By: Jagran

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