मुजफ्फरपुर, जेएनएन। शहर के गोबरसही चौक पर काला धुंआ उगलता यह ट्रक देखकर प्रदूषण के खतरे को समझा जा सकता है। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण धुंआ व धूलकण ही है। वायु में धूलकण की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाने से प्रदूषण का स्तर खतरे की घंटी बजा रहा है। शनिवार को भी इसका स्तर चिंताजनक ही रहा। प्रदूषण नियंत्रण की कसरत भी कमोवेश इसी हाल में है।

 प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए माकूल उपाय की बजाए खानापूरी भर की जा रही। यहीं कारण है कि दिल्ली, पटना के मुकाबले मुजफ्फरपुर में प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं हो रहा। प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से जारी आंकड़े चिंताजनक हालत बयां कर रहे हैं। एक दिन पूर्व के मुकाबले मुजफ्फरपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 से घटकर 288 तक पहुंचा तो है बावजूद ये स्थिति खतरनाक है।

  वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर अगर 51-100 के बीच हो तो यह संतोषजनक माना जाता है। उस हिसाब से 288 का स्तर उसकी भयावता को दर्शाता है। बिना ढंके भवनों का निर्माण, सड़क पर गंदगी धूलकण के वाहक हैं। इसके अलावा पुरानी गाडिय़ों का जहरीला धुआं, सड़कों की धूल भी इसका कारण है। निजी और व्यावसायिक वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ट्रैफिक जाम में चौक-चौराहों पर ये गाडिय़ां प्रदूषण बढ़ाती हैं।  

Posted By: Ajit Kumar

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