पश्चिम चंपारण, जासं। जिले में संभावित बाढ़ की कहर से जद्दोजहद की कवायद में किसी तरह की चूक या कमी नहीं हो, इसको लेकर पहले से ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। बाढ़ से जंग में पर्याप्त संख्या में सरकारी नाव नहीं होने के बावजूद प्रशासन ने निजी नावों के उपयोग की योजना बनाई है। जिसमें 149 निजी नाव संचालकों से एग्रीमेंट किया गया है।

वहीं 47 सरकारी नावों को भी दुरूस्त कर लिया गया है। इस तरह आपात स्थिति से निबटने के लिए 196 नावों के अलावा 9 मोटरबोट की तैनाती की जानी है। जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अनिल कुमार राय का कहना है कि बाढ़ व बचाव के लिए 98 लाइफ जैकेट की भी व्यवस्था कर ली गई है। ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में किसी तरह की समस्या नहीं आए। इतना ही नहीं बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित चिह्नित जगहों पर रहने के लिए 150 टेंट के अलावा 166 शरणस्थलियों को चिह्नित किया गया है। इन स्थलों पर रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को खाने में किसी तरह की कमी नहींं हो, इसके लिए 29 सामुदायिक किचेन भी संचालित की जाएगी।

113 गोताखोर बचाएंगे बाढ़ में फंसे लोगों की जान

संभावित बाढ़ के मद्देनजर गंडक, पंडई, सिकरहना सहित अन्य नदियों में बाढ़ पीड़ितों को बचाने के लिए गोताखोरों को उतारा जाएगा। जिसमें प्रशिक्षित 113 गोताखोर शामिल हैं। इतना ही नहीं अगर बाढ़ के पानी में आदमी या मवेशी फंसते हैं, तो इसके लिए महाजाल की व्यवस्था की गई है। ताकि जिले में आने वाले बाढ़ के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो। जान-मान की सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में आसानी से की जा सके।

कोरोना गाईडलाइन के तहत चलेगा बचाव कार्यक्रम

हाल के दिनों में कोरोना के दूसरी लहर में बाढ़ से बचाव व राहत कार्य में संक्रमण नहीं फैले, इसको लेकर कोरोना गाईडलाइन का पालन करने का निर्देश जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने दिया है। उन्होंने राहत कैंपों की जगहों पर बड़ा फ्लैक्सों लगाने को कहा है। ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत शिविर स्थलों के बाबत असानी से जानकारी मिल सके। उन्होंने इन जगहों पर प्रर्याप्त मात्रा में रोशनी की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया है। बाढ़ व कटाव पीड़ितों को रहने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसको लेकर वर्तमान समय में 19800 पॉलीथीन सीटों का इंतजाम किया गया है। इसमें पीड़ित परिवारों को अस्थाई रूप से शरण मिल सके।