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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 23, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

AES से बिहार में अब तक 175 की मौत, मॉनसून की बारिश से बीमारी पर लगी ब्रेक

By Rajesh ThakurEdited By:
Published: Sun, 23 Jun 2019 12:40 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jun 2019 11:48 PM (IST)

बिहार में कहर बनकर आए एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से होनेवाली मौत की रफ्तार में मॉनसून की बारिश ने ब्रेक लगा ...और पढ़ें

AES से बिहार में अब तक 175 की मौत, मॉनसून की बारिश से बीमारी पर लगी ब्रेक
AES से बिहार में अब तक 175 की मौत, मॉनसून की बारिश से बीमारी पर लगी ब्रेक

पटना [राजेश ठाकुर]। 175 deaths in Bihar from Acute Encephalitis Syndrome: बिहार में कहर बनकर आए एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से होनेवाली मौत की रफ्तार में मॉनसून की बारिश ने ब्रेक लगा दी है। दो दिनों में मुजफ्फरपुर में केवल तीन बच्चों की मौत हुई है। शनिवार को दिन भर में एक बच्चे की मौत हुई थी, वहीं रविवार को भी दोपहर तक दो बच्चे की मौत हुई है। वहीं नए मरीजों में भी काफी कमी आ गई है। रविवार को मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में दो बच्चे की हुई मौत के बाद केवल मुजफ्फरपुर में मृत बच्चों की संख्या 140 हो गई, जबकि पूरे बिहार में एईएस से मरनेवाले बच्चों की संख्या 175 पर पहुंच गई। बता दें कि बिहार सरकार भी इस बीमारी को लेकर काफी गंभीर है। सरकार ने जहां मरीजों के लिए कई तरह की सुविधाओं की घोषणा की है, वहीं मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपए देने की घोषणा पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर चुके हैं।   

माॅनसून की बारिश से मिली राहत 

मॉनसून की बारिश को लेकर जैसी उम्मीद थी, वैसा ही हुआ। शनिवार को मॉनसून की बारिश ने एईएस से होनेवाली मौत पर काफी हद तक विराम लगा दिया। डॉक्टरों की मानें तो एक-दो दिनों में यह बीमारी पूरी तरह थम जाएगी। शनिवार को मुजफ्फरपुर समेत पूरे प्रदेश में हुई बारिश ने काफी राहत दी। शनिवार को मुजफ्फरपुर में केवल एक मरीज की मौत हुई। सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर की अंजलि की मौत हो गई। वहीं पूर्वी चंपारण व बेगूसराय में भी शनिवार को एक-एक बच्चे की मौत हो गई है। रविवार को एसकेएमसीएच में दो बच्चे रूबी व नीरज की मौत हो गई है। नए मरीजों में भी काफी कमी आई है। 

बाकी जिलों में अब तक 35 की मौत 

मुजफ्फरपुर के अलावा उससे सटे जिलों में इस बीमारी ने अपना पांव फैला लिया था। इसमें वैशाली, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, भागलपुर, सीवान, शिवहर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। मिल रही जानकारी के अनुसार, वैशाली में 11, मोतिहारी में 7, समस्‍तीपुर में 5, भागलपुर में 5, शिवहर में 2 तथा बेगूसराय, भोजपुर, सीवान, बेतिया में एक-एक बच्चे की मौत हो गई है। इसके साथ ही पटना के पीएमसीएच में भी एक बच्चे की मौत हो गई। इस तरह, बाकी जिलों में 35 बच्चों की मौत हाे गई है।  

नीतीश सरकार ने की है 4-4 लाख मुआवजा की घोषणा 

बीमारी के कहर को देखते पिछले दिनों बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार एसकेएमसीएच पहुंचे थे। उन्‍होंने मुजफ्फरपुर में मरीजों के लिए कई तरह की सुविधाएं देने की घोषणा कीं। इसके साथ ही मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही कर दी थी। बता दें कि इसके पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगलवार पांडेय भी पहुंचे थे। विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधि भी एसकेएमसीएच पहुंच रहे हैं। शनिवार को सीपीआई नेता कन्हैया कुमार भी गए थे, जबकि गुरुवार को शरद यादव व खेसारी लाल यादव भी पहुंचे थे। 

10 सालों में करीब 450 बच्चों की मौत
विदित हो कि पिछले 10 सालों के दौरान उत्तर बिहार के 450 से अधिक बच्चों की मौत एईएस या इंसेफेलौपैथी से हो गई है। वर्ष 2012 व 2014 में इस बीमारी के कहर से मासूमों की ऐसी चीख निकली कि इसकी गूंज पटना से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। बेहतर इलाज के साथ बच्चों को यहां से दिल्ली ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था करने का वादा भी किया गया, मगर पिछले दो-तीन वर्षों में बीमारी का असर कम होने पर यह वादा हवा-हवाई ही रह गया। लेकिन इस वर्ष बीमारी ने अपना रौद्र रूप दिखाया और मृतकों का आंकड़ा 174 पर पहुंच गया। लगभग 600 बच्चे पीडि़त हुए। इसमें अभी भी 90 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। 

जानिए बीमारी के लक्षण
एईएस के लक्षण अस्पष्ट होते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसमें दिमाग में ज्वर, सिरदर्द, ऐंठन, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं होतीं हैं। शरीर निर्बल हो जाता है। बच्‍चा प्रकाश से डरता है। कुछ बच्चों में गर्दन में जकड़न आ जाती है। यहां तक कि लकवा भी हो सकता है।
डॉक्‍टरों के अनुसार इस बीमारी में बच्चों के शरीर में शर्करा की भी बेहद कमी हो जाती है। बच्चे समय पर खाना नहीं खाते हैं तो भी शरीर में चीनी की कमी होने लगती है। जब तक पता चले, देर हो जाती है। इससे रोगी की स्थिति बिगड़ जाती है।
वायरस से होता राेग, ऐसे करें बचाव
यह रोग एक प्रकार के विषाणु (वायरस) से होता है। इस रोग का वाहक मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। बच्चे के शरीर में रोग के लक्षण चार से 14 दिनों में दिखने लगते हैं। मच्छरों से बचाव कर व टीकाकरण से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

वर्षवार एईएस से मौत, एक नजर
2010: 24
2011: 45
2012: 120
2013: 39
2014: 86
2015: 11
2016: 04
2017: 04
2018: 11
2019: 175*
(*अब तक)

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