कोलकाता गोदाम हादसा: बिहार के चचेरे भाइयों समेत 3 की मौत; देर रात आएगा शव, 3 परिवार में मचा कोहराम
कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से धरहरा प्रखंड के तीन श्रमिकों की मौत हो गई, जिससे ...और पढ़ें

कोलकाता गोदाम हादसे में बेटे की मौत की खबर सुनकर बदहवास परिजन। फोटो- जागरण

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संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। रोजी-रोटी की तलाश में कोलकाता गए धरहरा प्रखंड के तीन श्रमिकों की मौत तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से बुधवार को हो गई।
गुरुवार को खबर परिवार वालों के पास पहुंची तो लगमा और मानगढ़ गांव में कोहराम मच गया। इस घटना में एक ही परिवार के चार लोग घायल हो गए हैं। बताया जाता है कि तीन की हालत चिंताजनक है।
घटना की सूचना मिलते ही दोनों गांवों में मातम पसर गया। स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतकों में लगमा गांव निवासी पप्पू राम का पुत्र शिरचन कुमार (18), राजेंद्र राम का पुत्र प्रेम कुमार (18) शामिल हैं।
इसके अलावा मानगढ़ गांव निवासी जवाहर राम का पुत्र नवीन राम (40) की भी मौत हुई है। शिरचन कुमार और प्रेम कुमार आपस में चचेरे भाई थे। दोनों युवकों की एक साथ मौत से गांव के लोग स्तब्ध हैं।

जिम्मेदारी उठाने निकले थे, मिली मौत की खबर
ग्रामीणों ने बताया कि सभी मजदूर कोलकाता में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार का सहारा बनने के लिए वे परदेस गए थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वे कभी वापस नहीं लौटेंगे।
मृतक प्रेम कुमार के पिता राजेंद्र राम अपने चार पुत्रों मन्नू कुमार, सोहित कुमार, माणिचन और प्रेम कुमार के साथ निर्माण कार्य में लगे थे।

हादसे में प्रेम कुमार की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज कोलकाता के अस्पताल में चल रहा है।
- कोलकाता गोदाम हादसे ने उजाड़े तीन घर, मुंगेर के धरहरा में पसरा मातम
- गोदाम की छत ढहने से 3 श्रमिकों की मौत, एक ही परिवार के 4 सदस्य घायल
- चचेरे भाइयों की एक साथ मौत से लगमा गांव में मचा कोहराम, देर रात आएगा शव
- 2 दिन पहले लौटे पिता बोले- हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरण नहीं थे
मां बदहवास, गांव में पसरा सन्नाटा
शिरचन कुमार की मां बेबी देवी बेटे की मौत की खबर सुनते ही बदहवास हो गईं। वह बार-बार बेटे का नाम लेकर विलाप करती रहीं। मां की चीत्कार सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
वहीं, प्रेम कुमार की मां नीरा देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। स्वजन महिलाओं को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। शिरचन के पिता ओडिशा में रहकर मजदूरी करते हैं और परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हैं। बेटे की मौत की खबर सुन वे भी गांव के लिए रवाना हो गए हैं।

मुआवजा और बेहतर इलाज की मांग
घटना के बाद लगमा और मानगढ़ गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य सरकार से मृतक के स्वजन को उचित मुआवजा देने तथा घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।
तीन श्रमिकों की असमय मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। दिवंगत शिरचन कुमार और प्रेम कुमार उर्फ घी कुमार के बड़े पिता कन्हैया राम ने बताया कि वह 23 जून को ही कोलकाता से घर आए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि तारातला स्थित निर्माणाधीन गोदाम में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर काम कराया जा रहा था। श्रमिकों के लिए हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की समुचित व्यवस्था नहीं थी।
नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य चल रहा था। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त होती तो शिरचन कुमार और प्रेम कुमार उर्फ घी कुमार समेत अन्य मजदूर इस हादसे का शिकार नहीं होते।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को निर्माणाधीन गोदाम की छत के ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई। समाचार लिखे जाने तक अभी भी कुछ लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई गई थी।
