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पति की मौत ने छीना घर का सहारा, बच्चों के निवाले को तरस रही मां! मुंगेर में 10 माह से सरकारी मदद की आस दफ्तरों के चक्कर

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:11 PM (IST)

Munger Road Accident Compensation Delays: मुंगेर की उमा देवी अपने पति की सड़क दुर्घटना में मौत के 10 महीने बाद ...और पढ़ें

दोनों बच्चों के साथ उमा देवी. जागरण

दोनों बच्चों के साथ उमा देवी. जागरण

HighLights

  1. पति की मौत के 10 माह बाद भी सरकारी सहायता नहीं।

  2. बच्चों के निवाले के लिए उमा देवी कर रही घरेलू काम।

  3. विधवा पेंशन, पारिवारिक लाभ, आपदा राहत राशि का इंतजार।

आनंद चौहान, संग्रामपुर (मुंगेर)। Munger Road Accident Compensation Delays: "पति के रहते जिस घर में दो वक्त की रोटी आसानी से जुट जाती थी, आज वहां चूल्हा जलाना भी एक बड़ा संघर्ष बन गया है।" संग्रामपुर ब्लॉक और जिला मुख्यालय के चक्कर काटती उमा देवी की यह सजल आंखें प्रशासनिक संवेदनहीनता की बानगी दे रही हैं। पति के सड़क हादसे में दुनिया छोड़ जाने के बाद पूरे परिवार के भरण-पोषण का पहाड़ जैसा बोझ उमा देवी के कंधों पर आ गया है।

कभी दूसरों के घरों में चौका-बर्तन कर बच्चों के लिए दो निवाले जुटाती हैं, तो कभी सरकारी मदद की आस में दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ती हैं। करीब 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सहायता राशि का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। नगर पंचायत संग्रामपुर के वार्ड संख्या एक चंदनियां निवासी कारेलाल मांझी (52) की 24 नवंबर  को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

पति की मौत के बाद उमा देवी ने सारे कागजात जुटाकर विधवा पेंशन, मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना और आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाली अनुग्रह राशि के लिए आवेदन किया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।

  • मुंगेर के नगर पंचायत संग्रामपुर स्थित चंदनियां की उमा देवी के पति कारेलाल मांझी की 24 नवंबर 2025 को हादसे में हुई थी मौत

  • पति की मौत के 10 महीने बीत जाने के बाद भी नहीं मिली विधवा पेंशन, मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ व आपदा राहत राशि

  • दो घरों में घरेलू काम कर बच्चों का पेट पाल रही हैं उमा देवी; मानसिक रूप से अस्वस्थ पुत्र और शादी योग्य बेटी का सहारा छिना

  • डीटीओ सुरेंद्र कुमार अलबेला बोले—आपदा राहत राशि के लिए ट्रिब्यूनल कोर्ट से होता है निर्णय; दर-दर भटकने को विवश पीड़िता

धान का बोझा ले जाते वक्त बाइक ने मारी थी टक्कर, थम गईं सांसें

घटना के दिन कारेलाल मांझी राज्य उच्च पथ-22 स्थित अजगैबीनाथ धाम-देवघर मुख्य मार्ग पर चंदनियां के समीप सिर पर धान का बोझा रखकर सड़क पार कर रहे थे। उसी दौरान तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।
 
गंभीर रूप से घायल कारेलाल को इलाज के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां 25 नवंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद पुलिस ने बाइक को जब्त कर लिया था, जबकि सवार फरार हो गए थे। कारेलाल अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र और दो पुत्रियों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए थे।

चौका-बर्तन कर पाल रहीं पेट; DTO बोले—ट्रिब्यूनल कोर्ट से होगा भुगतान

उमा देवी बताती हैं कि बड़ा बेटा अलग रहता है, जबकि दूसरा बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है। दो बेटियों की जिम्मेदारी भी उन पर ही है, जिनमें से बड़ी बेटी विवाह योग्य हो चुकी है। उमा देवी रोते हुए कहती हैं, सरकार से मिलने वाली सहायता राशि सिर्फ पैसा नहीं, मेरे अनाथ बच्चों का सहारा है। दफ्तरों में बार-बार बुलाया जाता है और केवल आश्वासन मिलता है।
 
इधर, मामले पर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) सुरेंद्र कुमार अलबेला ने बताया कि सड़क हादसे में मौत पर आपदा प्रबंधन के तहत सहायता का भुगतान परिवहन विभाग सीधे नहीं करता। इसके लिए ट्रिब्यूनल कोर्ट में फाइल जाती है और वहीं से निर्णय लिया जाता है।
 
फिलहाल उमा देवी के लिए यह मदद सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस घर की आखिरी उम्मीद है जहां रोज का निवाला भी संघर्ष से मिल रहा है।