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मुंगेर यूनिवर्सिटी का तीसरा दीक्षा समारोह: 762 को मिली उपाधि, 53 को स्वर्ण पदक

Published: Tue, 11 Aug 2026 05:24 PM (IST)

मुंगेर विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षा समारोह में 762 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई, जिसमें 53 को स्वर्ण पदक मिले और 35 छात्राएं शामिल थीं।

मुंगेर यूनिवर्सिटी का तीसरा दीक्षा समारोह: 762 को मिली उपाधि, 53 को स्वर्ण पदक

मुंगेर यूनिवर्सिटी का तीसरा दीक्षा समारोह: 762 को मिली उपाधि, 53 को स्वर्ण पदक

HighLights

  1. 762 विद्यार्थियों को उपाधि, 53 को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

  2. विश्वविद्यालय का विस्तार पांच जिलों में, छात्र सुविधाएं बढ़ीं।

  3. शोध को बढ़ावा, शिक्षकों की नियुक्ति और आधारभूत संरचना मजबूत।

जागरण संवाददाता, मुंगेर। मुंगेर विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षा समारोह मंगलवार को कुलपति प्रो. संजय कुमार की अध्यक्षता में हुआ। विद्वत यात्रा के साथ शुरू हुए समारोह में स्वस्तिवाचन, राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

कुलपति प्रो. संजय कुमार ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि समारोह के माध्यम से 762 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी। इनमें 53 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिया जाएगा, जिनमें 35 छात्राएं शामिल हैं।

कुलपति ने अपने करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का विस्तार पांच जिले मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा और खगड़िया में है।

विद्यार्थियों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए विश्वविद्यालय मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़े, इसके लिए सभी पांच जिलों में विस्तार पटल खोले गए हैं। विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए छात्र दरबार आयोजित करने का निर्णय लिया गया है और मुंगेर में इसका आयोजन भी हो चुका है।

20 एकड़ जमीन से बढ़ेगा विवि का दायरा

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करना प्राथमिकता है। वर्ष 2025 में नौवागढ़ी में विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई। भूमि का नक्शा भी तैयार किया जा चुका है। इससे भविष्य में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व प्रशासनिक विस्तार को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि अपने सवा वर्ष के कार्यकाल में यह दूसरा दीक्षा समारोह आयोजित किया जा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

शोध को बढ़ावा, 282 का पीएचडी में पंजीयन

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में पहली बार वर्ष 2025 में पीएचडी पंजीयन की प्रक्रिया कराई गई। इसमें 282 शोधार्थियों व शिक्षकों का पंजीयन हुआ। इनमें 16 शोधार्थियों ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) हासिल की, जबकि एक छात्रा को आईसीएसएसआर स्कॉलरशिप मिली।

शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में लगातार सेमिनार, वर्कशॉप और व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। पिछले सवा वर्ष में करीब 20 सेमिनार, वर्कशाप और लेक्चर आयोजित हुए।

वर्ष 2025 में शिक्षकों के 60 शोध पत्र प्रकाशित हुए, जबकि 12 पुस्तकों का भी प्रकाशन हुआ। कॉलेजों में शोध केंद्रों का संचालन भी किया जा रहा है।

शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ी पहल

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चुनौती थी। इसे दूर करने के लिए बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से 2025 में 100 नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की गई। इसके अलावा नवस्थापित राज्य के डिग्री कॉलेजों में 195 संविदा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

विश्वविद्यालय में वर्तमान में 89 अतिथि शिक्षक भी कार्यरत हैं। वर्ष 2025 में 19 अनुकंपा आश्रितों को लाभ दिया गया। कुलपति ने कहा कि शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में मदद मिलेगी।

पीएम-उषा से चार कॉलेजों को पांच-पांच करोड़

कुलपति ने बताया कि पीएम-उषा कार्यक्रम के माध्यम से कोशी कॉलेज, डीएसएम कॉलेज झाझा, एसकेआर कॉलेज बरबीघा और बीएनएम कॉलेज बड़हिया को भवन निर्माण के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये मिले हैं। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

कोशी कॉलेज में आडिटोरियम निर्माण के लिए चार करोड़ रुपये की राशि मिली है। महिला कॉलेज खगड़िया और बीआरएम कॉलेज में 21 कंप्यूटर सेट उपलब्ध कराए गए हैं। विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के लिए तकनीकी सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सिंगल विंडो से ऑनलाइन पोर्टल तक, विद्यार्थियों की सुविधा पर जोर

विद्यार्थियों की समस्याओं को कम करने के लिए विश्वविद्यालय में सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत एईसी, वीएसी और एसईसी को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इन विषयों के लिए अब तक पद सृजित नहीं होने से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है।

इस समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन पोर्टल विकसित कराया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी इन विषयों की पढ़ाई ऑनलाइन कर सकेंगे। कुलपति ने कहा कि तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी है।

600 युवाओं को आपदा मित्र प्रशिक्षण

कुलपति ने कहा कि एनएसएस के माध्यम से 600 युवाओं को आपदा मित्र प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया है। एनएसएस में एक पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है।

विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में एनएसएस की गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालय की पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी तैयार की गई है, जिसमें संस्थान के विकास और विभिन्न गतिविधियों को दर्शाया गया है।

रबर की खेती से किसानों की आय बढ़ाने की पहल

कुलपति ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय रबर की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए रबर रिसर्च इंस्टीट्यूट और हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ समझौता किया गया है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत जेआरएस कॉलेज में दो एकड़ जमीन पर करीब 300 रबर के पौधे लगाए गए हैं। यदि प्रयोग सफल रहा तो क्षेत्र के किसानों को रबर उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा और शोध को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना भी है।

थ्री पी के जरिए देश के विकास में योगदान दें विद्यार्थी : प्रो. सिन्हा

दीक्षा समारोह के विशिष्ट अतिथि माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू व नालंदा खुला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा आरडी एंड डीजे कॉलेज के शिक्षक रहे प्रो. रविंद्र कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों को ‘थ्री पी’ फ्रेमवर्क प्रोवर्टी, पाल्यूशन और पर्सनल सोशल रिस्पांसिबिलिटी की चर्चा करते हुए कहा कि इन तीनों क्षेत्रों के प्रति जागरूक रहकर युवा देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान में योगदान देना जरूरी है। प्रो. सिन्हा ने आरडी एंड डीजे कॉलेज को देश के पुराने कॉलेजों में से एक बताते हुए अपने संस्मरण साझा किए।

उन्होंने बताया कि उन्होंने 27 जून 1978 से 16 अप्रैल 1979 तक आरडी एंड डीजे कॉलेज में जंतु विज्ञान के शिक्षक के रूप में कार्य किया। उन्होंने आचार्य कपिल देव नारायण सिंह ‘कपिल’ के कार्यकाल को कॉलेज का स्वर्णिम काल बताया।

उन्होंने स्वास्थ्य के चार आयाम फिजिकल, मेंटल, सोशल और स्पिरिचुअल हेल्थ की चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए चारों के बीच संतुलन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में इंटीग्रिटी की कमी दिखाई देती है। विद्यार्थियों को यह विचार करना चाहिए कि कॉलेज का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा करने के बाद वे समाज और देश को क्या देंगे। आपका कल ही देश का कल है।

प्रो. सिन्हा ने नेशनल डाल्फिन रिसर्च सेंटर, पटना की स्थापना तथा अपने जीवन के विभिन्न संस्मरण भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए और उन्हें शोध व पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

कुलाधिपति का पेंसिल स्केच लेकर पहुंची छात्रा

जेआरएस कॉलेज की छात्रा प्रियंका कुमारी कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) के लिए पेंसिल से तैयार किया गया उनका चित्र लेकर समारोह में पहुंची थीं।

कुलाधिपति को चित्र भेंट करने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद प्रियंका ने चित्र कुलपति प्रो. संजय कुमार को सौंप दिया। कुलपति ने छात्रा के प्रयास की सराहना की।

दीक्षा शपथ के साथ नई जिम्मेदारी का संकल्प

विशिष्ट अतिथि के संबोधन के बाद कुलपति प्रो. संजय कुमार ने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा शपथ दिलाई। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक प्रो. दशरथ प्रजापत के नेतृत्व में विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र व मेडल प्रदान किए गए। 762 विद्यार्थियों के लिए यह दिन उनकी शैक्षणिक यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में यादगार रहा।

समारोह ने विद्यार्थियों को उपाधि देने के साथ ही उन्हें शोध, सामाजिक जिम्मेदारी, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का संचालन आरडी एंड डीजे कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या कुमार चौधरी तथा कुलसचिव डा घनश्याम राय ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में ये थे शामिल

कार्यक्रम में आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद सिंह, आरडी एंड डीजे कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. प्रभात कुमार, मेयर कुमकुम देवी, विधान पार्षद लालमोहन गुप्ता, जदयू जिलाध्यक्ष सौरभ निधि के अलावा सभी संकायाध्यक्ष, पीजी हेड, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, सीनेट व सिंडिकेट के सदस्य, शिक्षक, एनएसएस स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट्स व काफी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।