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मुंगेर के सरकारी स्‍कूूल में पानी के बिना सूखा चूल्हा, दूसरे गांव से मंगाया पानी; लकड़ी के धुएं पर DEO ने मांगा जवाब

Published: Sun, 13 Sep 2026 01:25 PM (IST)

Munger Dharhara School Mid Day Meal: मुंगेर के धरहरा स्थित कन्या मध्य विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए पानी की ...और पढ़ें

Munger Dharhara School Mid Day Meal:

Munger Dharhara School Mid Day Meal: 

HighLights

  1. पानी की कमी से मध्याह्न भोजन में देरी, बाहर से मंगाना पड़ा पानी।

  2. लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से धुआँ, पड़ोसियों को हुई परेशानी।

  3. डीईओ ने प्रधानाध्यापक से लकड़ी उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा।

संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। Munger Dharhara School Mid Day Meal: सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) मुहैया कराने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत शनिवार को कन्या मध्य विद्यालय धरहरा में तार-तार हो गई। विद्यालय में न तो बच्चों के पीने के लिए पानी उपलब्ध था और न ही भोजन पकाने के लिए। छत पर रखी पानी की टंकी पूरी तरह सूखी थी, बिजली बाधित रहने के कारण मोटर बंद पड़ी थी और स्कूल परिसर में लगा चापाकल पीने योग्य पानी नहीं दे रहा था। हालात इतने बदतर हो गए कि रसोइयों को भोजन पकाने के लिए महरना गांव से चार बड़े जार (बोतल) में पानी मंगाना पड़ा, जिसके बाद करीब 11:30 बजे किसी तरह चूल्हा जल सका।

  • कन्या मध्य विद्यालय धरहरा में पेयजल और बिजली संकट के चलते दोपहर 11:30 बजे तक नहीं जल सका था मिड-डे मील का चूल्हा

  • महरना गांव से चार बोतल पानी मंगाने के बाद बना खाना; निर्धारित समय 12:40 बजे के बजाय दोपहर 1:40 बजे छूटे भूखे बच्चे

  • एलपीजी सिलेंडर के अभाव में बरसात में गीली लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा खाना; धुएं से पड़ोसी नाराज, खिड़कियां करानी पड़ीं बंद

  • आदेश के बावजूद लकड़ी के इस्तेमाल पर DEO कुणाल गौरव ने प्रधानाध्यापक से मांगा जवाब; कमर्शियल सिलेंडर जमा होने की दी दलील

भोजन बनाने में हुई इस भारी लेटलतीफी का सीधा असर मासूम छात्र-छात्राओं पर पड़ा। विद्यालय में अवकाश का निर्धारित समय दोपहर 12:40 बजे था, लेकिन उस समय तक बच्चों का भोजन तैयार ही नहीं हो सका था। भूखे पेट इंतजार कर रहे बच्चों को दोपहर करीब 1:40 बजे खाना खिलाने के बाद छुट्टी दी गई। प्रधानाध्यापक आलोक कुमार ने बताया कि बिजली का तार प्रभावित होने से मोटर नहीं चल सकी और चापाकल का पानी खराब होने के कारण बाहर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ी।

गीली लकड़ी के धुएं से दमघोंटू माहौल, पड़ोसियों ने बंद कराई खिड़की

विद्यालय में भोजन गैस चूल्हे के बजाय पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जा रहा है। बरसात के मौसम में गीली लकड़ी जलने से निकलने वाले घने धुएं ने पूरे विद्यालय परिसर को गैस चैंबर बना दिया। धुआं रसोइयों, शिक्षिकाओं और मासूम बच्चों के लिए सांस लेना दूभर कर रहा है। हद तो तब हो गई जब स्कूल से उठने वाला दमघोंटू धुआं पड़ोस के घरों में घुसने लगा, जिसके विरोध के बाद स्कूल की खिड़कियों को बंद कराना पड़ा। रसोइया सुलेखा देवी, सरोज देवी और उषा देवी के साथ शिक्षक लालू प्रसाद व संजय कुमार ने भी बदहाल व्यवस्था, धुएं और पेयजल की समस्या पर गहरी चिंता जताई।

एलपीजी के बजाय लकड़ी का इस्तेमाल, डीईओ ने मांगा जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला मध्याह्न भोजन योजना कार्यालय ने 12 अगस्त को ही सभी विद्यालयों में अनिवार्य रूप से एलपीजी गैस सिलेंडर पर ही खाना पकाने का सख्त निर्देश जारी किया था। इसके बावजूद कन्या मध्य विद्यालय धरहरा में खुलेआम लकड़ी का उपयोग किया जा रहा था। विद्यालय शिक्षा समिति की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कुणाल गौरव ने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया है।

इधर, प्रधानाध्यापक आलोक कुमार ने अपनी सफाई में कहा कि विभाग के आदेश पर पुराना कमर्शियल सिलेंडर पूर्व में ही जमा करा लिया गया था, लेकिन विद्यालय को अब तक घरेलू सिलेंडर आवंटित नहीं हो सका है। इस तकनीकी समस्या की लिखित जानकारी पूर्व में ही विभाग को भेजी जा चुकी है।