खाली सिलेंडर, न दवा न डॉक्टर! मुंगेर सदर अस्पताल में रात का खौफनाक सच; 1 डॉक्टर पर 7 वार्ड, ICU से PICU तक बेबसी
Munger Sadar Hospital Night Reality Check: मुंगेर सदर अस्पताल में रात के समय स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं, ...और पढ़ें

Munger Sadar Hospital Night Reality Check: मुंगेर सदर अस्पताल में रात का सच; कंसंट्रेटर बंद व सिलेंडर खाली, 1 डॉक्टर पर 7 वार्डों का जिम्मा
HighLights
96 वर्षीय बुजुर्ग को ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा।
एक डॉक्टर पर इमरजेंसी सहित सात वार्डों का जिम्मा।
आईसीयू में दवाएं नदारद, परिजनों को बाहर से खरीदनी पड़ी।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger Sadar Hospital Night Reality Check: रात के करीब 10:30 बजे हैं। मुंगेर सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (इमरजेंसी) में कराहते मरीजों की कतार लगी है, लेकिन जरूरत के वक्त जीवन बचाने वाली सरकारी व्यवस्थाएं पूरी तरह लाचार दिखती हैं। पूरबसराय निवासी 96 वर्षीय बुजुर्ग तारणी प्रसाद सीने में असहनीय दर्द और उखड़ती सांसों के बीच अस्पताल लाए जाते हैं। उन्हें एक-एक पल में ऑक्सीजन की दरकार है।
स्वास्थ्यकर्मी आनन-फानन में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगाते हैं, लेकिन मशीन चालू ही नहीं होती। इसके बाद सिलेंडर मंगाया जाता है, तो पहला सिलेंडर पूरी तरह खाली निकलता है और दूसरे में भी दबाव बेहद कम मिलता है। किसी तरह जुगाड़ से ऑक्सीजन देकर चिकित्सक उन्हें आईसीयू रेफर करते हैं। रात की यह बानगी साबित करती है कि सरकारी तंत्र किस कदर मरीजों की सांसों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
रात 10:30 बजे : एक चिकित्सक और सात वार्डों की निगरानी
इमरजेंसी में डॉ. रूपेश कुमार अकेले ड्यूटी पर तैनात हैं। उनके कंधों पर इमरजेंसी के अलावा आईसीयू (ICU), पीकू (PICU) और एसएनसीयू (SNCU) सहित कुल सात अलग-अलग वार्डों की निगरानी का जिम्मा है। डॉक्टर कभी इस वार्ड तो कभी उस वार्ड की ओर दौड़ लगाते नजर आते हैं। ऐसे में अगर एक साथ दो गंभीर मरीज आ जाएं, तो किसकी जान बचेगी, इसका उत्तर देने वाला अस्पताल प्रबंधन में कोई नहीं है।
रात 11:00 बजे : प्रसव वार्ड में डॉक्टर की कुर्सी खाली
प्रसव वार्ड में सात प्रसूताएं भर्ती हैं। रिसेप्शन काउंटर पर नर्सिंग स्टाफ कागजी भर्ती प्रक्रिया निपटाने में व्यस्त है, जबकि ड्यूटी रूम में डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी है। पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर 'ऑन कॉल' हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाएगा। इसी बीच आशा और ममता कार्यकर्ताओं की आड़ में कुछ संदिग्ध बिचौलिए मरीजों के परिजनों के इर्द-गिर्द मंडराते दिखे, जो निजी क्लीनिकों का सिंडिकेट चलाने की ओर इशारा करते हैं।
रात 11:20 से 11:30 बजे : आईसीयू में दवा नदारद, दो वार्ड एक नर्स के हवाले
आईसीयू में 10 गंभीर मरीज जीवन-मौत से जूझ रहे हैं। यहां भर्ती एक मरीज को तत्काल नेबुलाइजेशन की जरूरत पड़ी, लेकिन अस्पताल के दवा भंडार में संबंधित दवा ही नहीं थी। बेबस परिजनों को आधी रात बाहर मेडिकल स्टोरों पर दौड़ना पड़ा। नर्सिंग स्टाफ ने खुद स्वीकार किया कि फेनार्गन सहित कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उधर, रात 11:30 बजे पुरुष और महिला वार्ड का जायजा लेने पर पता चला कि दोनों बड़े वार्डों का प्रभार अकेले स्टाफ नर्स सुमन कुमारी पर है। सुई और स्लाइन चढ़ाने जैसे संवेदनशील काम प्रशिक्षु छात्र (इंटर्न) कर रहे हैं।
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पीकू में 10 बच्चे और एसएनसीयू में 9 नवजात
रात 11:50 बजे पीकू वार्ड में 10 मासूम और एसएनसीयू में 9 नवजात भर्ती मिले। यहां भी विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं थे और सब कुछ ऑन-कॉल भरोसे चल रहा था। कई स्वास्थ्यकर्मी सिविल सर्जन के सख्त आदेश के बावजूद ड्रेस कोड में नहीं दिखे। व्यवस्था की बदहाली का शिकार हवेली खड़गपुर के गोवड्डा निवासी उत्तम यादव की छह वर्षीय बेटी रिमझिम भी हुई। छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल बच्ची को खड़गपुर पीएचसी से यहां रेफर किया गया था।
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छत से गिरी बच्ची भटकती रही
पीकू पहुंचने पर भी उसे समय पर उपचार नहीं मिला और घंटों भटकने के बाद देर रात इमरजेंसी में डॉ. रूपेश कुमार ने जांच कर दवा लिखी। मुंगेर सदर अस्पताल की यह नाइट रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यहां मरीज और उनकी बेबसी तो मौजूद है, लेकिन जीवन बचाने वाला सरकारी तंत्र नदारद है।
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