- मुंगेर गंगा पुल को स्थानीय लोग कहते हैं सपनों का पुल

- रेल परिचालन ने बदला मुंगेर के बाजार का अंकगणित

- सड़क पुल से आवागमन शुरू होने के बाद मुंगेर का विकास कर जाएगा बूम

प्रशांत, जागरण संवाददाता, मुंगेर : नई क्रांति का नया बिगुल है, लक्ष्य हमारा गंगा पुल है के नारे के साथ मुंगेर के लोगों ने वर्ष 1987 में गंगा नदी पर पुल बनाने को लेकर संघर्ष शुरू किया। धीरे धीरे इस संघर्ष में मुंगेर के साथ ही खगड़िया, बेगूसराय आदि जिला के लोग भी सहभागी बन गए। व्यापक आंदोलन शुरू हुआ। जागृति संस्था के बैनर तले शुरू हुए संघर्ष की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई। वरिष्ठ पत्रकार काशी प्रसाद, सांसद ब्रह्मानंद मंडल, राजेश जैन, कमल कुमार कमल, सरदार महेंद्र सिंह के साथ ही मुंगेर के हजारों नागरिक सड़क पर उतरे। वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया। उस समय मुंगेर में होली दीपावली एक साथ मनाई गई। वर्ष 2017 में रेल परिचालन शुरू हुआ। रेल परिचालन शुरू होने के बाद मुंगेर के बाजार का अंकगणित बदल गया है। लेकिन, अभी तक सड़क पुल से वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हुआ। क्योंकि, एप्रोच पथ के निर्माण में भू अर्जन का पेंच फंसा हुआ है। भू अर्जन में सबसे बड़ी समस्या टोपोलैंड है। नौ किलोमीटर लंबे एप्रोच पथ के निर्माण कार्य के दौरान टोपोलैंड के रैयतों ने काफी प्रदर्शन किया। इस मामले में राज्य सरकार ने सकारात्मक रवैया अपनाते हुए टोपोलैंड के रैयतों को भी मुआवजा देने की घोषणा कर दी है। जिला प्रशासन ने भी इसको लेकर अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। लेकिन, टोपोलैंड के रैयतों को मुआवजा भुगतान में काफी समय लगने की संभावना है। नागरिक मंच के महासचिव राजेश जैन ने कहा कि मुंगेर गंगा पुल मुंगेर के लोगों के लिए सपनों का पुल है। इसके निर्माण के बाद निश्चित रूप से मुंगेर के विकास को पंख लग सकता है। सिर्फ रेल परिचालन शुरू होने से मुंगेर के बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। शाहिद अख्तर उर्फ गुड्डू राईन ने कहा कि रेल परिचालन शुरू होने के बाद मुंगेर के बाजार में गंगा पार से सब्जी की आवक बढ़ी है। इसी कारण पूरे सीजन में कभी भी सब्जियों की कीमत में उछाल नहीं आया। अगर, सड़क पुल भी चालू हो जाएगा, तो निश्चित रूप से व्यवसाय बढ़ेगा। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि सड़क पुल से आवागमन शुरू होने के बाद मुंगेर का सीधा संपर्क कोसी और मिथिलांचल से जुड़ेगा। निश्चित रूप से मुंगेर के विकास को गति मिलेगी। लेकिन, यह तभी संभव है, जब टोपोलैंड की फांस दूर हो।

Posted By: Jagran