मुंगेर । जमालपुर प्रखंड के हलिमपुर गांव निवासी 46 वर्षीय अनिल ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गरीबी के कारण वह ¨जदगी और मौत के बीच जंग लड़ते लड़ते दुनिया को अलविदा कह दिया। आर्थिक संकट से जूझ रहे अनिल कुमार मंडल की मौत बीमारी का उपचार न कराने के काऱण मंगलवार को देर शाम घर मे ही हो गई। इस घटना से परिजन मे कोहराम मच गया। चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, तो पत्नी भी बेसहारा हो गई। अनिल बीते कुछ वर्ष से बीमारी से ग्रसित था। मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले अनिल बीते तीन वर्ष से बीमार था। आर्थिक तंगी के कारण अनिल की पत्नी अपने पति का बेहतर इलाज नहीं करा पा रही थी। गांव के उप मुखिया राजकिशोर मंडल, पत्रकार बिजय आनंद के पहल पर राजद नेता धीरेन्द्र मंडल, सोनू कुमार, शिक्षक प्रशांत, बंसंत राणा आदि ने आर्थिक मदद कर अस्पताल में भर्ती कराया। खाने पीने का समान दिया और दवाईयां भी। इस बीच मंगलवार को अनिल ने आखिरी सांस ली। हैरत की बात यह है कि गरीबी रेखा से नीचे होने बाद भी उसका और पूरे परिवार का नाम बीपीएल में होने के बावजूद उसे इंदिरा आवास नहीं दिया गया। मौत के बाद मुखिया की ओर से पहले 1 हजार की मदद की गई। वही एसडीओ खगेश चंद्र झा को जब मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने मुखिया एव पंचायत सेवक कबीर अन्तेय्षि्ट की पूरी राशि 3 हजार दिया गया। साथ ही अन्य सुविधा मुहैया करने का आश्वासन दिया गया। तीन माह पहले भी जागरण ने इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसकी पत्नी ने तब अपने बीमार पति के इलाज में मजदूरी के लिए फावड़ा उठा ली थी। तीन महीने मनरेगा में मजदूरी भी की, लेकिन उसका भुगतान आज तक नहीं हुआ। गरीब अनिल के शव को उठाने में राजद नेता धीरेन्द्र मंडल ,सोनू एवं स्थानीय ग्रामीणों ने ने अहम भूमिका निभाई।

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