मुंगेर। सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए जवान अजय कुमार यादव का शव तिरंगे में लिपटकर बुधवार को जमालपुर पहुंचा। विशेष हेलीकॉप्टर से शहीद के पार्थिव शरीर को सफियाबाद हवाई अड्डा लाया गया। हवाई अड्डा पर सीआरपीएफ के डीआइजी, डीएम उदय कुमार ¨सह, एसपी आशीष भारती, सीआरपीएफ कमांडेंट के साथ ही हजारों की भीड़ ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। शहीद सीआरपीएफ जवान अजय का शव जैसे ही सफियाबाद एरपोर्ट से जमालपुर स्थित पैतृक आवास की ओर बढ़ा, तो शहीद को श्रद्धांजलि देने लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। तीन किलोमीटर तक हर जगह लोग शहीद को नम आंखों से विदाई देने के लिए खड़े थे। घर पर शहीद परिजन की चित्कार से हर किसी की आखें नम हो गई। शव पर गश खाकर गिरी पत्नी स्प्रिया भारती को संभालने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। शहीद की पुत्री आराध्या (5 वर्ष) और पुत्र सौम्यश्री उर्फ ओम (3) घटना से अंजान होकर घर के दरवाजे पर उमड़ी भीड़ को अपलक निहार रहे थे। दादा जी सरयुग यादव और मां को रोता देख उन दोनों बच्चों की सिसकियां भी लोगों की आंखें नम कर दे रही थी। दरवाजे पर उमड़े जनसैलाब के बीच जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा जैसे गगनभेदी नारे से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो उठा था। शहीद सैनिक के शव के साथ आए सीआरपीएफ के डीआईजी गोपाल लाल मीणा, डीएम, एसपी आशीष भारती, एसडीओ डॉ कुंदन कुमार के सामने गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। साथ मे पहुंचे अजय के साथी जवान भी शहादत पर गर्व की अनुभूति करते हुए अजय की वीरता को याद किया।

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उधर उठा जनाजा, इधर फटा सभी का कलेजा

जमालपुर : शहीद जवान का पार्थिव शरीर चिता पर जाने के लिए उठा तो सभी का कलेजा फट पड़ा। हर आंखें नम थीं तो बोल नहीं फूट पा रहे थे। हालांकि शोक के बीच शहीद जवान अजय ¨जदाबाद के नारे फिजा में तैर रहे थे। बुधवार की दोपहर अर्थी को कंधा देने के लिए हर लोग बेताब दिखे। दरवाजे से परिजन की चीख पुकार के बीच अर्थी उठी और शव को सैनिक वाहन से मुंगेर गंगा घाट स्थित श्मशान लाया गया। सीआरपीएफ जवानों के साथ ही जनपद के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अंतिम सलामी दिए जाने के बाद गंगा नदी के तट पर सजाई गई चिता पर शव रखा गया। बेटे द्वारा पिता को मुखाग्नि देते वक्त एक बार फिर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।

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मुआवजा की नहीं है दरकार, नक्सलियों का खात्मा करे सरकार

जमालपुर : छतीसगढ़ के सुकमा में मंगलवार की सुबह नक्सली हमले में शहीद हुए 9 जवानों में मुंगेर जिले के जमालपुए के रहने वाले सीआरपीएफ के जवान अजय कुमार यादव भी शामिल था। वीर सपूत की शहादत की खबर मिलने के बाद से ही पत्नी, पिता सरयुग यादव और भाइयों का रोते-रोते बुरा हाल है। पूरा परिवार शोक में डूबा है, फिर भी अपने लाल की वीरता पर गर्व है।

सरयुग यादव के तीन पुत्रों में अजय तीसरे नंबर पर थे। बड़े भाई और छोटे भाई रेल और आरपीएफ में है। मोहल्ले व घर के लोग अजय को प्यार करते थे

। बुधवार को जब शहीद का शव घर पहुंचा तो घरवालों ने रोते हुए कहा कि अजय देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ है। उसकी शहादत तभी सार्थक होगी जब पूरी तरह नक्सलियों का खात्मा हो। सरकार देश भर में नक्सलियों को जड़ से खत्म करे। मुआवजे की जरूरत नहीं है। यह कह कर पूरे घर के लोग फफक फफक कर रोने लगे। सामाजिक लोगों ने कहा कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के पीछे नक्सली और आतंकवादियों को जड़ से मिटाना ही मकसद था। लेकिन अभी तक नक्सलियों का सफाया नहीं किया गया है। सुकमा में पहले भी कई जवान शहीद हो गए है। अब ऐसे नही चलेगा।

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सीआरपीएफ डीआईजी ने दिया आश्वासन

जमालपुर - शहीद का शव उठने के बाद पूर्व मंत्री और जदयू के वरीय नेता उपेंद्र वर्मा सीआरपीएफ के डीआईजी से मिले। उन्होंने शहीद के परिजन को मिलने वाले सभी तरह के लाभ को अविलंब पूरा करने की बात कही। मंत्री ने कहा कि अजय मिलनसार इंसान था। उसके दोनों बच्चे और पत्नी सहित पूरे परिवार को किसी तरह की दिक्कतें न हों, इसके लिए सभी काम समय से हो जाए। डीआईजी ने आश्वासन देते हुए कहा कि अजय काफी बहादुर जवान था। उसपर सभी को गर्व है। शहीद के परिजन को सभी सुविधाएं अविलंब मुहैया कराई जाएगी।

Posted By: Jagran