26 साल पुराना मुकदमा चंद मिनटों में खत्म! मुंगेर में 1829 केसों का निपटारा, 8.47 करोड़ की सुलह, बिजली बिल में राहत
Munger National Lok Adalat 2026: मुंगेर व्यवहार न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें 2702 वादों में ...और पढ़ें

Munger National Lok Adalat 2026: मुंगेर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों की सुनवाई करते न्यायिक पदाधिकारी
HighLights
मुंगेर लोक अदालत में 1829 मामलों का रिकॉर्ड निपटारा हुआ।
एक 26 साल पुराने जटिल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान किया गया।
कुल 8.47 करोड़ रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी।
जागरण संवाददाता, मुंगेर। Munger National Lok Adalat 2026: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार शनिवार को मुंगेर व्यवहार न्यायालय परिसर में इस वर्ष की राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में सुलह-समझौते के जरिए वर्षों पुराने मुकदमों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने की। दिनभर चली सुनवाई के दौरान कुल 2702 वादों को पटल पर रखा गया, जिनमें से दोनों पक्षों की रजामंदी से रिकॉर्ड 1829 मामलों का ऑन-द-स्पॉट निष्पादन किया गया। इस दौरान कुल 8 करोड़ 47 लाख 31 हजार 184 रुपये की समझौता राशि पर अंतिम सहमति बनी।
मुंगेर व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन; कुल 2702 मामलों की सुनवाई में से 1829 केसों का हुआ निष्पादन
आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कुल 8 करोड़ 47 लाख 31 हजार 184 रुपये की भारी-भरकम राशि पर बनी सहमति
पीठ संख्या 1 में ADJ तृतीय विकास मिश्रा ने लगभग 26 वर्ष पुराने लंबे विवाद का कराया ऐतिहासिक निपटारा
आम जनता की सहूलियत के लिए गठित की गईं 14 विशेष न्यायिक पीठें और 3 विधिक सहायता केंद्र; बैंक, बिजली व वैवाहिक केस सुलझे
लोक अदालत की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि लगभग 26 वर्षों से अदालत के चक्कर काट रहे एक अत्यंत पुराने और पेचीदा वाद का सफल निस्तारण रहा। पीठ संख्या एक में पीठासीन अधिकारी सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे तृतीय) विकास मिश्रा ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर इस 26 साल पुराने विवाद का राजी-खुशी पटाक्षेप कराया, जिससे दोनों पक्षकारों के चेहरों पर वर्षों बाद सुकून दिखाई दिया।
766 न्यायिक और 1063 प्रीलिटिगेशन मामलों का हुआ खात्मा
प्राधिकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल निष्पादित 1829 मामलों में 766 विभिन्न न्यायालयों में लंबित शमनीय (कंपाउंडेबल) न्यायिक मामले थे, जबकि 1063 मामले ऐसे थे जो विवाद पूर्व (प्रीलिटिगेशन) स्तर पर ही सुलझा लिए गए। लोक अदालत में बैंकिंग ऋण, बीमा एवं मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी), सुलहनीय आपराधिक एवं दीवानी वाद, राजस्व मामले, पेंशन व सेवा संबंधी विवाद, पारिवारिक एवं वैवाहिक कलह, विद्युत विपत्र, पानी का बिल, टेलीफोन विवाद, श्रम, खनन, मजदूरी और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों की गहन सुनवाई हुई।
14 न्यायिक पीठों और तीन सहायता केंद्रों से मिली सहूलियत
न्यायालय परिसर में आने वाले वादकारियों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुविधा के लिए कुल 14 विशेष पीठों का गठन किया गया था। इसके साथ ही मामलों की त्वरित जानकारी और मार्गदर्शन के लिए परिसर में तीन विधिक सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्राधिकार के सचिव दिनेश कुमार ने किया। उन्होंने अधिक से अधिक वादकारियों से अदालती चक्कर से बचने और लोक अदालत के माध्यम से समय व धन की बचत करने की अपील की।
लोक अदालत को संबोधित करते हुए जिला जज राकेश कुमार सिंह ने कहा कि लोक अदालत का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इसमें किसी भी पक्ष की न तो जीत होती है और न ही किसी की हार। दोनों पक्ष सम्मानजनक समझौते के साथ राजी-खुशी अपने घर लौटते हैं, जिससे समाज में पारस्परिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा मिलता है। इस अवसर पर सभी पीठों के न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, बैंक प्रबंधक, विद्युत व विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित थे।
