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पर्चा मिला, जमीन नहीं! मुंगेर में 31 साल से 400 भूमिहीन परिवार कब्जे के इंतजार में, डीएम ने अब अभियान का दिया भरोसा

Published: Wed, 07 Oct 2026 05:31 PM (IST)

मुंगेर में 'अभियान बसेरा' के तहत सैकड़ों भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा तो मिला, लेकिन 31 साल बाद भी उन्हें ...और पढ़ें

मुंगेर में दखल देहानी की आस लगाए बेघर पीड़ित भूमिहीन परिवार।

मुंगेर में दखल देहानी की आस लगाए बेघर पीड़ित भूमिहीन परिवार।

HighLights

  1. मुंगेर में 400 से अधिक भूमिहीन परिवार जमीन से वंचित।

  2. दबंगों और भू-माफिया के कब्जे से जमीन नहीं मिल रही।

  3. डीएम ने भूमिहीनों को जमीन दिलाने के लिए अभियान का भरोसा दिया।

शिंताशु शेखर सिंह, मुंगेर। बिहार सरकार द्वारा गरीबों और भूमिहीनों को छत मुहैया कराने के लिए चलाए जा रहे 'अभियान बसेरा' की जमीनी हकीकत मुंगेर जिले में कागजी दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

जिले में सैकड़ों गरीबों के हाथों में सरकारी बासगीत पर्चा तो थमा दिया गया है, लेकिन अपने ही हक की जमीन पर पहला कदम रखने का अधिकार उन्हें दशकों बाद भी नहीं मिल सका है।

सिर छिपाने के लिए अपने घर का सपना संजोए ये गरीब परिवार सरकारी पर्चा लेकर पंचायत से लेकर अंचल कार्यालय (अंचलाधिकारी) के चक्कर काटने को विवश हैं।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिले में कुल 1634 भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा आवंटित किया गया था, जिनमें से केवल 952 परिवारों को ही जमीन उपलब्ध कराई जा सकी है। शेष 400 से अधिक पर्चाधारियों के लिए यह पर्चा महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह गया है।

केस स्टडीज: पर्चाधारियों का छलका दर्द, जमीन पर कब्जा लेने पहुंचते हैं तो भगा देते हैं दबंग

  • केस स्टडी-1 (हलीमपुर, जमालपुर): पिछले 50 वर्षों से हलीमपुर में रह रहे कमलेश्वरी मंडल बताते हैं कि करीब तीन साल पहले उन्हें सरकार की ओर से पर्चा मिला था। लेकिन आज तक वास्तविक जमीन का टुकड़ा नहीं मिला। वे अत्यंत विकट परिस्थितियों में गुजर-बसर कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि जहां वे वर्षों से बसे हैं, वहीं उन्हें स्थायी रूप से बसाया जाए।

  • केस स्टडी-2 (बनवर्षा, हवेली खड़गपुर): नर्मदा देवी ने रोते हुए बताया कि चार साल पहले पर्चा मिलने पर लगा था कि अब उनका भी अपना पक्का घर बनेगा। लेकिन जमीन पर कब्जा न मिलने से घर बनाने का सपना अधूरा है।

  • केस स्टडी-3 (बनवर्षा, हवेली खड़गपुर): पंची देवी ने दर्द बयां करते हुए कहा कि जब भी वे अपनी आवंटित जमीन पर कब्जा लेने या सीमांकन कराने पहुंचती हैं, वहां पहले से मौजूद दबंग और जमीन मालिक उन्हें गाली-गलौज कर भगा देते हैं। बार-बार गुहार लगाने पर भी समाधान नहीं हुआ।

  • केस स्टडी-4 (बनवर्षा, हवेली खड़गपुर): मंगल कापरी ने बताया कि जमीन पर अवैध कब्जे की लिखित शिकायत स्थानीय प्रशासन से कई बार की गई, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला। परिवार अब जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठा है।

  • 31 वर्षों से अटका कब्जा: कहीं कागजी विसंगति तो कहीं दबंगों और भू-माफिया का शिकंजा

    पड़ताल के दौरान सामने आया है कि पर्चाधारियों को जमीन न मिलने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं—पहला सरकारी अभिलेखों और जमाबंदी की गंभीर त्रुटियां तथा दूसरा आवंटित जमीन पर स्थानीय दबंगों और भू-माफिया का अवैध कब्जा।

    टेटिया बंबर प्रखंड की नोनाजी पंचायत स्थित झिटिकिया टार गांव के रघु मांझी, गुनी मांझी, अवधेश मांझी सहित 16 भूमिहीन परिवारों को वर्ष 1995 में ही बासगीत पर्चा मिला था, लेकिन 31 साल गुजर जाने के बाद भी ये परिवार जमीन के एक टुकड़े को तरस रहे हैं।

    इसी तरह हवेली खड़गपुर के प्रसंडो-बनवर्षा गांव में वर्ष 2022 में 11 परिवारों को पर्चा दिया गया, पर आज तक वहां जमीन पर भू-माफिया का कब्जा कायम है।

    "पर्चाधारियों को उनकी आवंटित जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने के लिए जिला स्तर पर अंचलवार 'दखल देहानी' विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अतिक्रमण से संबंधित जो भी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उनका त्वरित जांच कराकर तत्काल समाधान किया जा रहा है। जिला प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य सभी पात्र गरीबों को उनकी जमीन पर पूर्ण अधिकार दिलाना है।"

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    — निखिल धनराज निप्पाणीकर, जिलाधिकारी , मुंगेर