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घर से शुरू होगा मशरूम का कारोबार! मुंगेर कृषि विज्ञान केंद्र में 30 महिलाओं को 5 दिवसीय प्रशिक्षण, आत्मनिर्भरता की राह

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:05 PM (IST)

मुंगेर कृषि विज्ञान केंद्र में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।

मुंगेर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में शामिल महिला किसान एवं कृषि वैज्ञानिक

मुंगेर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में शामिल महिला किसान एवं कृषि वैज्ञानिक

HighLights

  1. मुंगेर केवीके में महिलाओं को 5 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण।

  2. 30 महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यावहारिक ज्ञान।

  3. कम लागत में मशरूम उत्पादन से आय बढ़ाने पर जोर।

संवाद सहयोगी, मुंगेर। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मुंगेर में बुधवार से पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में महिला किसानों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों और इसके व्यावसायिक महत्व से रूबरू कराया जा रहा है। प्रशिक्षण का विधिवत उद्घाटन केवीके के वरीय वैज्ञानिक मुकेश कुमार और कृषि विज्ञानी डॉ. बीडी सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण के प्रथम दिन क्षेत्र की 30 महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिन्हें मशरूम खेती को एक सफल लघु उद्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) मुंगेर में अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत महिला किसानों के लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

  • वरीय वैज्ञानिक मुकेश कुमार और डॉ. बीडी सिंह ने किया शुभारंभ; पहले दिन 30 महिला किसानों ने लिया भाग

  • कम जमीन और घर के संसाधनों में मशरूम खेती को ग्रामीण महिलाओं की आय वृद्धि व स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया बताया

  • प्रशिक्षण में स्पॉन चयन, कंपोस्ट तैयारी, तापमान प्रबंधन और तुड़ाई जैसी व्यावहारिक बारीकियां सिखाई जाएंगी

कम लागत और सीमित स्थान में बेहतर आय, स्वरोजगार की दिशा में केवीके की सराहनीय पहल

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम उत्पादन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए खेती योग्य बड़ी जमीन की आवश्यकता नहीं होती। घर के आसपास या कमरों में उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग कर बहुत छोटे स्तर से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है।

डॉ. बीडी सिंह ने प्रशिक्षु महिलाओं को मशरूम की विभिन्न उपयुक्त प्रजातियों, उसकी पोषण उपयोगिता, उत्पादन तकनीक और बाजार में इसकी बढ़ती आर्थिक मांग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक ग्रामीण महिलाओं के लिए घर बैठे आय सृजन का एक बेहतरीन माध्यम है।

स्पॉन चयन से लेकर तुड़ाई तक की व्यावहारिक ट्रेनिंग, महिलाओं को मिलेगा व्यावहारिक ज्ञान

केवीके के वरीय वैज्ञानिक मुकेश कुमार ने बताया कि इस पांच दिवसीय आवासीय/प्रशिक्षण सत्र के दौरान महिलाओं को महज किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) ट्रेनिंग दी जाएगी।

प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त स्थान व कमरे का चयन, गुणवत्तापूर्ण बीज (स्पॉन) की व्यवस्था, उत्पादन कक्ष का सैनिटाइजेशन, सही कंपोस्ट खाद तैयार करना, नमी व तापमान का संतुलन बनाए रखना तथा मशरूम की सही समय पर तुड़ाई और पैकेजिंग की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाएगी, ताकि महिलाएं प्रशिक्षण के तुरंत बाद अपना उद्यम शुरू कर सकें।