7.45 करोड़ खर्च फिर भी खड़गपुर झील बदहाल! मुंगेर में जर्जर सड़क-बंद लाइटों ने खोली सौंदर्यीकरण की पोल, जवाबदेही पर सवाल
मुंगेर की ऐतिहासिक खड़गपुर झील के सौंदर्यीकरण पर 7.45 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद, आकर्षक लाइटें बंद और सड़कें जर्जर होने से व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं हैं।

गेस्ट हाउस से शिवमंदिर तक की जर्जर सड़क. जागरण
HighLights
खड़गपुर झील सौंदर्यीकरण पर 7.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
आकर्षक लाइटें बंद और 600 मीटर सड़क जर्जर मिली।
एजेंसी ने भुगतान में देरी, अधिकारियों ने तकनीकी कमी बताई।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। ऐतिहासिक खड़गपुर झील को राज्य के प्रमुख पर्यटकीय आकर्षण के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा 7.45 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण का काम कराया जा रहा है। मेसर्स अनिमा कंस्ट्रक्शन पटना द्वारा जुलाई 2022 से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की समय-सीमा बढ़ाकर नवंबर 2026 की गई है।
एजेंसी का दावा है कि 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और छठ पूजा तक इसे पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया जाएगा। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ सकी हैं।
मुंगेर के प्रसिद्ध खड़गपुर झील को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा 7.45 करोड़ रुपये से कराया जा रहा सौंदर्यीकरण कार्य
90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण होने के दावे के बावजूद परिसर में लगी आकर्षक लाइटें बंद, शाम ढलते ही छाया रहता है अंधेरा
सिंचाई भवन गेस्ट हाउस से शिव मंदिर तक की 600 मीटर सड़क बदहाल; एजेंसी ने बजट व सामग्री परिवहन की बताई समस्या
पर्यटन अधिकारी और जूनियर इंजीनियर ने माना- कार्य अभी निर्माणाधीन, तकनीकी गड़बड़ियों को जल्द ठीक कराने का दिया निर्देश
परिसर में लगाई गई आकर्षक स्ट्रीट लाइटें अभी से बंद पड़ी हैं, जिससे शाम होते ही झील परिसर में अंधेरा पसर जाता है। इसके अलावा सिंचाई भवन गेस्ट हाउस से शिव मंदिर तक की 600 मीटर सड़क पूरी तरह जर्जर हाल में है।
50 पोल्स पर लगी लाइटें खराब, जर्जर सड़क से पर्यटक हलकान
झील परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए आकर्षक प्रवेश द्वार, सड़क से पानी तक 18 मीटर चौड़ा और 40 मीटर गहरा सीढ़ी घाट, स्टील रेलिंग, दो सेल्फी प्वाइंट, कैफेटेरिया, पार्किंग, गजीबो (झोपड़ीनुमा बैठक) और शौचालय का निर्माण कराया गया है।
साथ ही 50 पोल्स पर फैंसी लाइटें और एक हाईमास्ट लाइट लगाई गई है। लेकिन रखरखाव और तकनीकी कमियों के कारण लाइटें जल ही नहीं रही हैं। निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि मनोज कुमार का कहना है कि अब तक मात्र 4.50 करोड़ रुपये का ही भुगतान मिला है। सड़क निर्माण की सामग्री कार्यस्थल तक ले जाने में आ रही व्यावहारिक परेशानी के कारण सड़क का काम सबसे अंत में कराया जाएगा।
अधिकारियों की सफाई: निर्माणाधीन है प्रोजेक्ट, कमियां होंगी दूर
लाइटों के न जलने और सड़क की बदहाली पर पर्यटन विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि अर्थिंग की समस्या और जंपर खराब होने के कारण लाइटों में व्यवधान आया है।
संवेदक को निर्देश दिया गया है कि वे सभी गड़बड़ियों को अविलंब दुरुस्त कराएं। गेस्ट हाउस से शिव मंदिर तक की सड़क को अंत में बनाया जाना प्रस्तावित है।
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