मुंगेर: जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन का नया नियम लागू, 2 साल बाद बिना न्यायिक आदेश के नहीं बनेगा सर्टिफिकेट
मुंगेर में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में दो साल से अधिक की देरी होने पर अब न्यायिक आदेश अनिवार्य ...और पढ़ें

दो साल बाद जन्म-मृत्यु के पंजीकरण में पेंच, न्यायिक आदेश अब जरूरी (AI Generated Image)
HighLights
जन्म-मृत्यु पंजीकरण में दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक आदेश अनिवार्य।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को संशोधित कानून पालन का निर्देश दिया।
दो साल के भीतर पंजीकरण मौजूदा प्रावधानों के तहत ही किया जाएगा।
संवाद सूत्र, मुंगेर। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने में दो साल से अधिक की देरी अब आसान नहीं होगी। ऐसे मामलों में बिना न्यायिक आदेश के पंजीकरण नहीं किया जा सकेगा। संशोधित कानून के तहत दो वर्ष से अधिक विलंब होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।
नियमों के अनुपालन को लेकर जिलाधिकारी निखिल धनराज ने जिले के सभी शहरी निकायों और प्रखंडों के संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है।
डीएम ने नगर आयुक्त, मुंगेर, नगर परिषद जमालपुर और हवेली खड़गपुर के कार्यपालक पदाधिकारियों के साथ नगर पंचायत संग्रामपुर, तारापुर और असरगंज के कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है।
सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) को भी अपने-अपने क्षेत्र के रजिस्ट्रार को संशोधित प्रावधानों की जानकारी देने को कहा गया है। अधिकारियों को पंजीकरण की प्रक्रिया में कानून का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।
दो साल के अंदर पुरानी प्रक्रिया से होगा पंजीकरण
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधित) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के अनुसार, घटना की तारीख से दो वर्ष के भीतर विलंबित सूचना मिलने पर पंजीकरण बिहार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली के मौजूदा प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
वहीं, दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी का आदेश लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना है।
नियमित समीक्षा करेंगे अधिकारी
जिलाधिकारी ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कार्य की नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक आवेदन का निपटारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार हो।
संशोधित अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत किसी भी परिस्थिति में पंजीकरण नहीं किया जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित रजिस्ट्रार नए नियमों की जानकारी रखते हुए ही पंजीकरण की कार्रवाई करें।
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