इलाज में लापरवाही पर मुंगेर सदर अस्पताल में तोड़फोड़; मरीज की मौत के बाद 10 घंटे ठप रही इमरजेंसी, 60 मरीज लौटे
मुंगेर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप ...और पढ़ें
HighLights
मरीज की मौत पर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया।
इलाज में लापरवाही का आरोप, इमरजेंसी 12 घंटे ठप।
प्रशासन के आश्वासन पर शांत हुआ गुस्सा, जांच के आदेश।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। मॉडल सदर अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार देर रात इलाज के दौरान सीताकुंड कल्याणक निवासी धीरज कुमार (30) की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की।
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हंगामे के कारण मंगलवार रात से लेकर बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे तक अस्पताल की इमरजेंसी सेवा पूरी तरह बाधित रही। इस दौरान इलाज के अभाव में लगभग 60 मरीज बिना इलाज कराए लौटने को मजबूर हो गए। यही नहीं, बुधवार सुबह ओपीडी (OPD) सेवा भी करीब आधे घंटे तक प्रभावित रही।
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घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली, पूरबसराय और कासिम बाजार थाने की पुलिस टीम के साथ सदर बीडीओ मौके पर पहुंचे। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद परिजन लंबे समय तक आक्रोशित रहे।
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'पैदल चलकर अस्पताल आए थे पति'
मृतक धीरज की पत्नी नेहा कुमारी ने बताया कि उनके पति मंगलवार सुबह करीब 10 बजे खुद पैदल चलकर अस्पताल इलाज कराने आए थे, जिसकी सत्यता सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से जांची जा सकती है।
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पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों ने बीडीओ के समक्ष आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों ने प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे 8 से 10 हजार रुपये ऐंठ लिए। पहली बोतल चढ़ाने के बाद ही मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद दूसरी बोतल चढ़ा दी गई और जब हालत अति-गंभीर हो गई तो डॉक्टरों ने पल्ला झाड़ते हुए भागलपुर रेफर करने की बात कही, जिसके बाद धीरज की मौत हो गई।
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तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम
घटना की गंभीरता को देखते हुए सदर बीडीओ ने परिजनों को आश्वस्त किया कि लिखित शिकायत मिलते ही निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी चिकित्सकों व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
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जांच के आदेश
प्रशासनिक आश्वासन के बाद परिजनों का गुस्सा शांत हुआ। इसके बाद शव का तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद बुधवार सुबह अस्पताल की स्थिति सामान्य हो सकी और सेवाएं बहाल की गईं।
