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    बिहार में डॉक्टर से मांगी गई 2 करोड़ रुपये की रंगदारी, इमरजेंसी वार्ड में घुसकर मारपीट

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 06:18 PM (IST)

    मुंगेर सदर अस्पताल में डॉ. हर्षवर्धन से दो करोड़ की रंगदारी मांगी गई और इमरजेंसी वार्ड में मारपीट की गई। डॉक्टर ने पंकज पटेल पर रंगदारी मांगने, सरकारी काम में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

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    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    संवाद सहयोगी, मुंगेर। सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गुरुवार की रात एक गंभीर घटना घटित हुई, जब ड्यूटी पर तैनात डॉ. हर्षवर्धन कुमार गोविंदा के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया।

    यह घटना रात करीब 10:30 बजे की है। डॉ. हर्षवर्धन ने इस मामले की लिखित शिकायत अस्पताल के उपाधीक्षक, सिविल सर्जन और एसपी से की है। उन्होंने अपने आवेदन में पंकज पटेल नामक युवक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा डालना, दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगना, अपहरण और गोली मारने की धमकी देना शामिल है।

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    डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि पंकज पटेल पिछले कई दिनों से उनसे रंगदारी की मांग कर रहा था और राशि न देने पर इमरजेंसी यूनिट में ड्यूटी करने से रोकने की चेतावनी दे रहा था। हालांकि, डॉक्टर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन गुरुवार की रात स्थिति अचानक भयावह हो गई।

    डॉ. हर्षवर्धन के अनुसार, 27 नवंबर की रात करीब 10:30 बजे ड्यूटी के दौरान पंकज पटेल ने उनके मोबाइल पर 7091448466 नंबर से फोन कर गाली-गलौज की। इसके बाद वह अपने सहयोगियों के साथ इमरजेंसी वार्ड में घुस आया और उनके साथ मारपीट करते हुए धमकी दी।

    इसके तुरंत बाद, डॉ. हर्षवर्धन ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही पंकज और उसके सहयोगी वहां से फरार हो गए। उन्होंने पंकज पटेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस मामले में अब तक कोतवाली थाना में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

    अस्पताल प्रबंधन ने घटना को गंभीर मानते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पास अक्सर ऐसे दलाल सक्रिय रहते हैं, जो गंभीर बीमार मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाने के लिए दबाव बनाते हैं। अस्पताल परिसर में असामाजिक तत्वों की बढ़ती सक्रियता से स्वास्थ्यकर्मियों में दहशत का माहौल बना हुआ है।