चोरी के डर से नहीं छोड़ा घर, मचान पर कट रही जिंदगी; मुंगेर के सैलाब में चूल्हा ठंडा, भूख से जंग लड़ रहे लोग
Munger Flood Ground Report: मुंगेर में गंगा की बाढ़ से कुतलुपुर, जाफरनगर और झौवा बहियार पंचायतें प्रभावित हैं, जहां लोग ...और पढ़ें

Munger Flood Ground Report: मुंगेर में मचान पर कट रही जिंदगी, चोरी के डर से घर नहीं छोड़ रहे लोग; भूख से जंग जारी
HighLights
बाढ़ पीड़ित चोरी के डर से घर नहीं छोड़ रहे।
हजारों लोग मचान पर रहकर भूख का सामना कर रहे हैं।
प्रशासन गांवों में सामुदायिक किचन शुरू करेगा।
संवाद सूत्र, मुंगेर। Munger Flood Ground Report: चारों तरफ हिलोरे मारता गंगा का मटमैला पानी, आशियाने के भीतर तक पसरा सैलाब और ठंडे पड़े चूल्हे—मुंगेर सदर प्रखंड की कुतलुपुर, जाफरनगर और बरियारपुर प्रखंड की झौवा बहियार पंचायत में जिंदगी इन दिनों ऐसी ही त्रासद तस्वीर से जूझ रही है। अधिकांश कच्चे-पक्के घरों में एक से दो फीट तक पानी भर चुका है।
कई परिवार तो मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों और राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी ऐसी है जो अपना घर छोड़ने को कतई तैयार नहीं है। खून-पसीने से जुटाए गृहस्थी के सामान की चोरी के डर से लोग पानी के बीच बांस-बल्ली के सहारे मचान बनाकर रहने को मजबूर हैं। दिन की चिलचिलाती धूप हो या रात का घुप अंधेरा, जिंदगी इसी मचान पर सिमट गई है; लेकिन अब सबसे बड़ा संकट पेट की भूख बुझाने का खड़ा हो गया है।
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कुतलुपुर पंचायत के मुखिया जितेंद्र रजक बताते हैं कि यह पंचायत 18 वार्डों में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में फैली है। लगभग 500 बाढ़ पीड़ित अपने बाल-बच्चों और मवेशियों के साथ अमरपुर हाईस्कूल स्थित सरकारी राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं, जहां सामुदायिक किचन से उन्हें भोजन और पशु चारा मिल रहा है। लेकिन असल त्रासदी उन 2,500 से अधिक लोगों की है जो अब भी गांव के भीतर चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। घर डूब जाने के कारण भोजन पकाने की कोई जगह नहीं बची है और इन परिवारों तक न तो तैयार खाना पहुंच रहा है और न ही सूखा राशन।
मचान पर फंसी जिंदगी, राहत शिविर में तो मिल रहा खाना
कुतलुपुर के सबसे गंभीर रूप से प्रभावित वार्ड संख्या चार, छह और सात के वार्ड सदस्य शुभंकर शर्मा, बबलू मंडल और दिनेश महतो का कहना है कि प्रशासन का सारा ध्यान मुख्य सड़क या शिविरों तक ही सीमित है। राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था है, लेकिन जो लोग पानी के बीच मचान पर भूखे-प्यासे बैठकर अपने घर की रखवाली कर रहे हैं, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मासूम बच्चों की निगाहें दिनभर पानी के रास्ते आने वाली किसी राहत भरी नाव का इंतजार करती रहती हैं, मगर दिन ढलने तक पानी के बढ़ते बहाव के सिवा कुछ नजर नहीं आता।
मुंगेर सदर प्रखंड के कुतलुपुर, जाफरनगर और बरियारपुर के झौवा बहियार में बाढ़ का पानी घुसने से भयावह स्थिति
चोरी के डर से ग्रामीण नहीं छोड़ रहे डूबा हुआ घर, पानी के बीच बांस-बल्ली की मचान बनाकर दिन-रात कर रहे पहरेदारी
घरों में पानी भरने से चूल्हे ठंडे; कुतलुपुर के 2500 लोग पानी में घिरे, अब तक नहीं पहुंचा सूखा राशन व पका खाना
प्रशासन ने बांटी 2660 पॉलिथीन शीट; राहत शिविर के बाद अब पानी में फंसे ग्रामीणों के लिए गांव में शुरू होगा सामुदायिक किचन
जाफरनगर पंचायत का हाल भी कमोबेश यही है। मुखिया अरुण यादव के अनुसार पंचायत के सभी 12 वार्ड पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। आधे से ज्यादा आबादी अपने घरों की हिफाजत के लिए पानी के बीच मचान पर बैठी है। समय पर बुनियादी प्रशासनिक सहायता और सूखा राशन न मिलने से ग्रामीणों में असंतोष पनप रहा है।
2660 पॉलिथीन शीट का वितरण, अब गांव में चलेगा किचन
बाढ़ के संकट को देखते हुए जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने कुतलुपुर इलाके का स्थलीय निरीक्षण कर पीड़ितों के बीच 550 पॉलिथीन शीट का वितरण किया था। इसके बाद मंगलवार को अंचल प्रशासन के माध्यम से मुखिया और वार्ड सदस्यों को 2,660 अतिरिक्त पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें नावों के जरिए पानी में घिरे प्रभावित परिवारों तक भेजा जा रहा है।
अमरपुर राहत शिविर में भी 200 लोगों को तिरपाल और शीट दी गई है। अंचलाधिकारी (सीओ) अंजली कुमारी ने बताया कि अमरपुर हाईस्कूल में पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई पहले से चल रही है। अब गांव के भीतर पानी में फंसे लोगों की परेशानी और जनप्रतिनिधियों की मांग को देखते हुए गांव के समीप भी सूखा राशन पैकेट और अतिरिक्त सामुदायिक किचन शुरू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
