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घर डूबा, आंगन छूटा... बाढ़ में भी नहीं डिगी तीज की आस्था! मुंगेर के राहत शिविरों में सुहागिनों ने रखा निर्जला उपवास

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:21 PM (IST)

Munger Flood Hartalika Teej Ground Report: मुंगेर में बाढ़ से विस्थापित सैकड़ों महिलाओं ने राहत शिविरों में रहते हुए भी ...और पढ़ें

Munger Flood Hartalika Teej Ground Report: घर डूबा, आंगन छूटा लेकिन बाढ़ में नहीं डिगी आस्था; मुंगेर के राहत शिविरों में सुहागिनों ने रखा निर्जला तीज व्रत

Munger Flood Hartalika Teej Ground Report: घर डूबा, आंगन छूटा लेकिन बाढ़ में नहीं डिगी आस्था; मुंगेर के राहत शिविरों में सुहागिनों ने रखा निर्जला तीज व्रत

HighLights

  1. मुंगेर के राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ित महिलाओं ने तीज व्रत रखा।

  2. घर-द्वार बहने के बावजूद सुहागिनों की आस्था नहीं डिगी।

  3. कठिन निर्जला उपवास कर पति की दीर्घायु की कामना की।

जागरण संवाददाता, मुंगेर। Munger Flood Hartalika Teej Ground Report:  चारों तरफ गंगा का मटमैला उफनता पानी, सिर से छिन चुकी पक्की छत और आंखों के सामने बाढ़ की बेबसी...। जिस आंगन में हर साल हरतालिका तीज पर उत्साह, हंसी-ठिठोली और विधि-विधान से पूजा की तैयारियां होती थीं, वह आंगन आज जलमग्न है। घर-गृहस्थी का सामान पानी में बह चुका है।

इन तमाम दुश्वारियों के बावजूद आस्था और सुहाग की अटूट डोर बाढ़ के तेज बहाव में भी नहीं टूटी। मुंगेर के दियारा इलाके के सीताचरण और जाफरनगर गांव की सैकड़ों विस्थापित महिलाएं इस समय बबुआ घाट और जिला स्कूल के राहत शिविरों में तिरपाल के नीचे दिन काट रही हैं। इसी अस्थायी ठिकाने पर उन्होंने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार के कुशलक्षेम के लिए हरतालिका तीज का 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा है।

  • मुंगेर में गंगा के रौद्र रूप से घर-आंगन डूबे; सीताचरण और जाफरनगर की विस्थापित महिलाओं ने राहत शिविरों में रखा तीज का व्रत

  • बबुआ घाट और जिला स्कूल के शरणार्थी शिविरों में न नहाने की मुकम्मल व्यवस्था, न पूजा सामग्री रखने का ठिकाना; फिर भी नहीं डिगी आस्था

  • बाढ़ के मटमैले पानी में बह गईं पूजा सामग्रियां, जो बचा उसी से भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना में जुटीं सुहागिनें

  • पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास; प्रार्थना बस एक— 'जल्द उतरे पानी और लौट सकें अपने घर'

सोमवार को जागरण की टीम ने इन राहत शिविरों में पहुंचकर विपरीत परिस्थितियों में तीज व्रत कर रहीं महिलाओं की जमीनी हकीकत जानी। सुबह से ही बबुआ घाट पर व्रतियों की चहल-पहल दिखी। किसी के हाथ में बाढ़ से बचाई गई पूजा की टूटी-फूटी थाली थी, तो कोई गीले कपड़ों के बीच बची हुई पूजन सामग्री समेटकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की तैयारी में जुटी थी। न रहने का ढंग का ठिकाना, न स्नान की मुकम्मल व्यवस्था और न ही एकांत में पूजा करने का स्थान। हजारों विस्थापितों के बीच भीड़भाड़ और गंदगी के साए में यह कठिन निर्जला उपवास किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, लेकिन महिलाओं की दृढ़ आस्था के आगे बाढ़ की आपदा भी नतमस्तक नजर आई।

सामान बह गया, पर व्रत नहीं छोड़ सकते: मनीषा

सीताचरण निवासी मनीषा कुमारी की आंखें घर का जिक्र होते ही भर आती हैं। उन्होंने बताया, "घर में जब कमर तक पानी भर गया, तो बाल-बच्चों और थोड़े-बहुत सामान को लेकर बबुआ घाट की शरण लेनी पड़ी। हर साल घर पर बड़े उल्लास से तीज करती थी, लेकिन यहां न ठीक से नहाने की जगह है और न ही पूजा का सामान सुरक्षित रखने का ठिकाना। दिनभर बिना अन्न-जल के रहना है, उस पर घर के बर्बादी की चिंता अलग से सता रही है। मन भारी है, लेकिन पति के लिए यह व्रत छोड़ भी नहीं सकते।"

Munger Flood Women Observe Hartalika Teej in Relief Camps

पूजा का सामान पानी में खराब, शिविर में जैसे-तैसे तैयारी: रीना

जिला स्कूल के शरणार्थी शिविर में रह रहीं जाफरनगर की रीना देवी बताती हैं कि घर में तीज पूजा के लिए पहले से खरीदकर रखा गया अधिकांश सामान बाढ़ के पानी में भीगकर नष्ट हो गया। रीना कहती हैं, "राहत शिविर में साफ-सफाई की भारी किल्लत है। सैकड़ों लोगों के बीच रहकर व्रत की मर्यादा निभाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। व्रत रखा है, पर मन बार-बार डूबे हुए घर और मवेशियों की फिक्र में लगा रहता है। पति की लंबी उम्र की कामना से जुड़ा यह पावन पर्व है, इसलिए इतनी विपदा में भी पीछे नहीं हटे।"

भोलेनाथ दूर करेंगे संकट, जल्द लौटेंगे अपने आशियाने: सुनीता

बबुआ घाट पर शरण लिए सुनीता देवी और कोमल कुमारी का दर्द भी अलग नहीं है। दोनों का कहना है कि बाढ़ ने घर-द्वार छीन लिया, पर ईश्वर पर भरोसा नहीं छीना। वे कहती हैं, "भूखे-प्यासे रहकर ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में उपवास करना बेहद पीड़ादायक है। खाने-पीने से लेकर बच्चों की सुरक्षा तक की चिंता है। फिर भी पूरा विश्वास है कि भगवान शिव और माता पार्वती हमारे इस संकट को जल्द हरेंगे, गंगा का पानी उतरेगा और हम सब फिर से अपने आशियाने में लौट सकेंगे।"